Jammu & Kashmir में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए सरकार **₹1.2 लाख करोड़** की लागत से **87** टनल प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। हालांकि यह प्रोजेक्ट ट्रेड और लॉजिस्टिक्स के लिए गेम-चेंजर हो सकता है, लेकिन दुर्गम भौगोलिक स्थिति और रेगुलेटरी बाधाएं निवेशकों के लिए एक बड़ा रिस्क भी हैं।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन राज्य की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदलने के लिए एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोग्राम को तेज कर रहा है। कुल 87 प्रोजेक्ट्स के लिए ₹1.2 लाख करोड़ का बजट तय किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के अलग-थलग पड़े इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ना है। यह न केवल आर्थिक व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि कठिन सर्दियों के दौरान मिलिट्री लॉजिस्टिक्स के लिए भी लाइफलाइन का काम करेगा।
प्रोजेक्ट्स का स्टेटस
वर्तमान में, 44 प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है, जिनमें ₹39,711 करोड़ का निवेश किया गया है। इसके अलावा, 11 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है, जिनकी लागत ₹9,187 करोड़ है। साथ ही, 32 प्रोजेक्ट्स अभी प्लानिंग स्टेज में हैं, जिनकी अनुमानित लागत ₹70,839 करोड़ है।
प्रमुख प्रोजेक्ट्स और बड़ी कंपनियां
इस बड़े मिशन का केंद्र 14.15 किमी लंबा Zojila टनल है, जिसे Megha Engineering & Infrastructure Limited बना रही है। इस टनल का काम फरवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जो लद्दाख के लिए साल भर खुली रहने वाली सप्लाई लाइन साबित होगी। इसके साथ ही, Union Cabinet ने हाल ही में ₹9,800 करोड़ के Singhpora-Vailoo और Sudhmahadev-Dranga टनल प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
हिमालय के चुनौतीपूर्ण भूभाग में निर्माण करना आसान नहीं है। भू-वैज्ञानिक अनिश्चितताएं (Geological uncertainties) और खराब मौसम के कारण काम में देरी होना एक सामान्य बात है। इसके अलावा, जमीन अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस जैसी प्रशासनिक बाधाएं भी लागत (Cost Overruns) बढ़ा सकती हैं, जो निर्माण कंपनियों के फाइनेंशियल परफॉरमेंस पर सीधा असर डाल सकती हैं।
निवेशकों को अब प्रोजेक्ट्स की गति, फंडिंग की निरंतरता और National Highways Authority of India (NHAI) की तरफ से मिलने वाली मंजूरियों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
