जम्मू-कश्मीर में 27 अक्टूबर, 2026 को हुए कैबिनेट विस्तार के बाद से ही नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर हलचल तेज हो गई है। कई विधायक कैबिनेट में फेरबदल की मांग कर रहे हैं, जिससे सरकार की नीतिगत कार्यप्रणाली और गवर्नेंस पर सवाल उठने लगे हैं।
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इस समय घमासान मचा हुआ है। सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायक कैबिनेट विस्तार के बाद से अपनी ही पार्टी से नाराज नजर आ रहे हैं। असंतुष्ट विधायकों के एक समूह ने मुख्यमंत्री Omar Abdullah के करीबियों और कुछ मुख्य सलाहकारों के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं और एक औपचारिक शिकायत दर्ज की है।\n\nबागी विधायकों ने Nasir Aslam Wani और Shammi Oberoi जैसे वरिष्ठ नेताओं और सलाहकारों को हटाने की मांग रखी है। उनका तर्क है कि पार्टी को बेहतर प्रतिनिधित्व और स्पष्ट नीतिगत तालमेल की जरूरत है। इसके अलावा, ये विधायक राज्य का दर्जा बहाल करने और अनुच्छेद 370 से जुड़े संवैधानिक मुद्दों पर अधिक आक्रामक रुख अपनाने का दबाव बना रहे हैं। फिलहाल Farooq Abdullah और मुख्यमंत्री डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं ताकि पार्टी की एकता बनी रहे।\n\nबिजनेस और गवर्नेंस की नजर से देखें, तो 90 सदस्यों वाली विधानसभा में सरकार को 54 सीटों का बहुमत हासिल है, जिससे फिलहाल सरकार गिरने का कोई खतरा नहीं है। हालांकि, आंतरिक मतभेद के चलते सरकारी कामकाज और विकास परियोजनाओं की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। ध्यान रहे, नेशनल कॉन्फ्रेंस कोई लिस्टेड कंपनी नहीं है, इसलिए इसका शेयर बाजार या किसी फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट पर सीधा असर नहीं होगा। निवेशकों के लिए फिलहाल नजर इस बात पर है कि क्या पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट गुट को मनाने में सफल हो पाता है या यह तनाव आने वाले दिनों में और गहराता है।
