Jain Irrigation Systems ने कार्बन मार्केटप्लेस Supercritical के साथ एक अहम समझौता किया है। इसके तहत कंपनी **19,000** टन बायोचार क्रेडिट्स की आपूर्ति करेगी, जिससे उसके लिए कमाई का एक नया रास्ता खुल गया है।
कमाई का नया जरिया (New Revenue Stream)
Jain Irrigation Systems अब ग्लोबल कार्बन रिमूवल मार्केट में कदम रख रही है। कंपनी ने यूके के प्लेटफॉर्म Supercritical के साथ करार किया है। इसके तहत कंपनी अपने जलगांव प्लांट में तैयार किए गए 19,000 टन बायोचार क्रेडिट्स की सप्लाई करेगी। यह क्रेडिट्स वायुमंडल से कार्बन हटाने के प्रमाणित सर्टिफिकेट के तौर पर काम करेंगे।
कैसे काम करेगा यह प्लांट?
कंपनी के जलगांव प्लांट में गैसीफिकेशन (Gasification) तकनीक का इस्तेमाल होता है, जो कृषि अवशेषों और फूड प्रोसेसिंग वेस्ट को बायोचार में बदल देती है। इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे सिनगैस (Syngas) भी निकलती है, जिसे कंपनी अपने ऑपरेशंस में ईंधन की तरह इस्तेमाल कर रही है, जिससे फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम हो रही है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
यह कदम कंपनी के बिजनेस मॉडल में एक बड़े डायवर्सिफिकेशन की तरह देखा जा रहा है। हालांकि, निवेशकों को यह समझना होगा कि कार्बन क्रेडिट का योगदान कंपनी के मुख्य इरिगेशन और फूड प्रोसेसिंग सेगमेंट के मुकाबले अभी काफी छोटा है।
इन चुनौतियों पर रखें नजर
कंपनी के लिए सफलता इस बात पर टिकी है कि वह अपने प्रोजेक्ट को कैसे स्केल करती है। फिलहाल, Puro.earth के जरिए वेरिफिकेशन और BeZero Carbon की रेटिंग का काम चल रहा है। यदि सर्टिफिकेशन या मानक बनाए रखने में देरी होती है, तो कंपनी को इन क्रेडिट्स को प्रीमियम रेट पर बेचने में दिक्कत आ सकती है। भविष्य के नतीजों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह 'ग्रीन' पहल कंपनी के मुनाफे में कितना योगदान दे पाती है।
