आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम YS Jagan Mohan Reddy ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग की है। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया है कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान TDP गठबंधन विपक्षी उम्मीदवारों को डरा-धमका रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री और YSRCP नेता YS Jagan Mohan Reddy ने साल 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून में बड़े बदलाव की वकालत की है। अपनी पार्टी के पुराने रुख से उलट, रेड्डी का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सरकार का हस्तक्षेप बहुत अधिक है। उनका मानना है कि निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया किसी स्वतंत्र निकाय के पास होनी चाहिए।\n\n### चुनावी धांधली के गंभीर आरोप\n\nराज्य में 28 अक्टूबर को होने वाले शहरी चुनाव और 3 नवंबर को होने वाले ZPTC-MPTC चुनावों से ठीक पहले यह मामला गरमाया है। रेड्डी का आरोप है कि YSRCP उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोका जा रहा है और पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल विपक्षी कार्यकर्ताओं को डराने, मारपीट और अपहरण जैसे कामों के लिए किया जा रहा है।\n\n### फर्जी वोटर्स का मुद्दा\n\nरेड्डी ने प्रशासन पर 46 लाख फर्जी वोटर्स को हटाने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। इसके अलावा, उन्होंने कडप्पा, तिरुपति और पुंगनूर जैसे इलाकों में वार्डों के परिसीमन (Delimitation) को भी सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में बताया है।\n\n### राजनीतिक स्थिरता पर असर\n\nइन विवादों का सीधा असर राज्य की प्रशासनिक स्थिरता पर पड़ सकता है। निवेशकों और मार्केट जानकारों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्थानीय चुनावों की निष्पक्षता और वहां का राजनीतिक माहौल सीधे तौर पर 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और प्रशासनिक निरंतरता को प्रभावित करते हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग इन शिकायतों पर क्या रुख अपनाता है।
