ओड़िशा हाई कोर्ट ने JSW Steel को बड़ी राहत देते हुए माइनिंग डिमांड से जुड़े एक बड़े विवाद में फैसला कंपनी के पक्ष में सुनाया है। कोर्ट ने **₹696.32 करोड़** की डिमांड को खारिज कर दिया है और **₹1,472.69 करोड़** की एक अन्य नोटिस पर फिर से मूल्यांकन करने का आदेश दिया है।
कानूनी राहत और उसका असर
JSW Steel के लिए ओड़िशा हाई कोर्ट का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। 16 अक्टूबर, 2026 को दिए गए आदेश में कोर्ट ने वित्तीय वर्ष 2020-2021 से संबंधित ₹696.32 करोड़ की डिमांड नोटिस को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। यह नोटिस मिनरल डिस्पैच में कमी के कारण जारी किया गया था, जिसे लेकर कंपनी लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रही थी।
FY25 के लिए नई उम्मीद
मामला केवल पुराने बकाया तक सीमित नहीं है। वित्तीय वर्ष 2025 के लिए प्रशासन ने कंपनी पर ₹1,472.69 करोड़ की भारी-भरकम पेनल्टी लगाई थी। हाई कोर्ट ने इस नोटिस को भी दरकिनार कर दिया है और माइनिंग अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे 20 अप्रैल, 2026 को आए पुराने कोर्ट ऑर्डर के आधार पर इस दावे का नए सिरे से मूल्यांकन करें। इससे कंपनी पर पड़ने वाला तत्काल वित्तीय दबाव कम हो गया है।
जाजंग माइनिंग ब्लॉक का महत्व
यह सारा विवाद कंपनी के 'जाजंग' आयरन ओर माइनिंग ब्लॉक से जुड़ा है। स्टील कंपनियों के लिए कैप्टिव माइनिंग यूनिट्स का होना बेहद जरूरी होता है, ताकि वे कच्चे माल की लागत पर नियंत्रण रख सकें। यह डिमांड 'मिनरल्स (अदर दॅन एटॉमिक एंड हाइड्रो कार्बन्स एनर्जी मिनरल्स) कंसेशन रूल्स, 2016' के 'रूल 12-A' के तहत की गई थी। इस नियम के अनुसार, माइन ऑपरेटरों को एक तय मात्रा में मिनरल डिस्पैच करना होता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
शेयरधारकों के नजरिए से यह राहत भरी खबर है। बड़ी लीगल पेनल्टीज अक्सर कंपनी की बैलेंस शीट पर अनिश्चितता का बोझ डालती हैं और कैपिटल को फंसा देती हैं। हालांकि, FY25 वाली डिमांड अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, बल्कि इसे रिव्यु के लिए भेजा गया है, जिस पर आगे भी बाजार की नजर बनी रहेगी। फिलहाल के लिए, अनिश्चितता कम होने से कंपनी की ऑपरेशनल स्थिरता में सुधार की उम्मीद है।
