सिंघानिया परिवार का वेंचर JKC Sports अगले 5 सालों में स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर **₹150 करोड़** खर्च करने की तैयारी में है। कंपनी अब अपनी खुद की स्पोर्ट्स प्रॉपर्टी बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। निवेशकों के लिए ध्यान देने वाली बात यह है कि यह एक प्राइवेट कंपनी है और लिस्टेड JK Cement से पूरी तरह अलग है।
बड़े बदलाव की ओर कदम
JKC Sports ने अगले 4 से 5 वर्षों में भारतीय स्पोर्ट्स इकॉनमी में अपनी पैठ जमाने के लिए ₹100 करोड़ से ₹150 करोड़ तक के निवेश की घोषणा की है। कंपनी का लक्ष्य स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और खुद की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) तैयार करना है।
निवेशकों को यह समझना बेहद जरूरी है कि JKC Sports एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है और यह शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है। माधवकृष्ण सिंघानिया और राघवपत सिंघानिया द्वारा शुरू किया गया यह वेंचर, JK Cement जैसी लिस्टेड कंपनियों से स्वतंत्र रूप से काम करता है।
फ्रेंचाइजी मॉडल से हटकर खुद की पहचान
कंपनी अब अपना बिजनेस मॉडल बदल रही है। पहले इनका फोकस मध्य प्रदेश T20 लीग की ग्वालियर फ्रेंचाइजी और काशी रुद्रास जैसी टीमों में निवेश पर था, लेकिन अब कंपनी बाहरी फ्रेंचाइजी के बजाय खुद के प्लेटफॉर्म और ग्रास-रूट टैलेंट इकोसिस्टम बनाने पर जोर दे रही है।
कंपनी शूटिंग, स्क्वाश, स्विमिंग, बैडमिंटन, रेसलिंग और पावरलिफ्टिंग जैसे खेलों में अवसरों की तलाश कर रही है। इस काम के लिए एक विशेष 'कैपेबिलिटी सेंटर' भी बनाया गया है।
रिस्क और चुनौतियां
स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश काफी कैपिटल-इंटेंसिव होता है और इसका गेस्टेशन पीरियड (रिटर्न मिलने का समय) भी लंबा होता है। मैन्युफैक्चरिंग के मुकाबले, स्पोर्ट्स IP से मुनाफा आने में कई साल लग सकते हैं। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपनी योजनाओं को कितनी मजबूती से लागू करती है और लंबी अवधि में मार्केट में अपनी जगह कैसे बनाती है।
