📉 हालत बेहद नाजुक, ऑपरेशन से कमाई नहीं
Invigorated Business Consulting Limited (पूर्व में Escorts Finance Limited) की वित्तीय स्थिति Q3 FY26 (31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही) में बेहद चिंताजनक रही। कंपनी ने बताया कि ऑपरेशन से शून्य (NIL) रेवेन्यू आया है, जो कि एक बहुत बड़ा रेड फ्लैग है। इसका मतलब है कि कंपनी अपने बताए गए बिजनेस सेगमेंट में कोई काम नहीं कर रही है।
हालांकि, 'अन्य आय' से कंपनी की कुल आय ₹5.04 लाख रही, जो पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) के ₹5.94 लाख से कम है। खर्चों को ₹20.86 लाख (Q3 FY25 में ₹23.16 लाख से कम) तक लाने के बावजूद, कंपनी को ₹21.21 लाख का नेट लॉस (टैक्स के बाद) हुआ। पिछले साल की तिमाही के मुकाबले यह लॉस थोड़ा कम है, लेकिन कंपनी की मूल समस्या जस की तस बनी हुई है।
9 महीने के नतीजे और भी बुरे
इस फाइनेंशियल ईयर के पहले नौ महीनों (9MFY26) के नतीजों को देखें तो स्थिति और भी गंभीर है। कुल आय घटकर सिर्फ ₹15.37 लाख रह गई, जो पिछले साल के ₹29.30 लाख के मुकाबले काफी कम है। सबसे चिंता की बात यह है कि नेट लॉस बढ़कर ₹69.15 लाख हो गया है, जो पिछले साल के ₹54.76 लाख के लॉस से काफी ज्यादा है। कंपनी का प्रति शेयर आय (EPS) भी नकारात्मक रहा, जो Q3 FY26 के लिए ₹(0.0134) और 9MFY26 के लिए ₹(0.0447) रहा।
❓ ऑडिटर की राय पर बड़ा सवालिया निशान
सबसे गंभीर चिंता का विषय ऑडिटर, M/s. G A R & Company, का रवैया है। उन्होंने कंपनी के वित्तीय विवरणों (Financial Disclosures) में गंभीर खामियों का हवाला देते हुए अपनी ऑडिट राय (Audit Opinion) देने से साफ इनकार कर दिया है। इसके साथ ही, मैनेजमेंट ने स्वीकार किया है कि खातों को 'गोइंग कंसर्न बेसिस' (यानी, कंपनी के चलते रहने की क्षमता) पर तैयार किया गया है, जबकि इस पर गंभीर संदेह हैं।
कंपनी की नेट वर्थ पूरी तरह खत्म हो चुकी है। 'अन्य इक्विटी' (Other Equity) -₹21,949.57 लाख पर है, जो कि पेड-अप शेयर कैपिटल ₹4,017.25 लाख से कहीं ज्यादा नकारात्मक है। कंपनी का पूरा ध्यान अपनी पिछली NBFC ऑपरेशंस से डूबे हुए लोन एसेट्स की वसूली पर है। कंपनी ने ₹699.70 लाख और ₹253.82 लाख के 'डाउटफुल एडवांसेज' (Doubtful Advances) की जानकारी दी है। कंपनी ने भविष्य के लिए कोई अनुमान (Financial Guidance) नहीं दिया है।
🚩 आगे का रास्ता अंधकारमय
Invigorated Business Consulting Limited का भविष्य बेहद अनिश्चित दिख रहा है। कंपनी अपने कंसल्टेंसी/एडवाइजरी बिजनेस से कोई कमाई नहीं कर रही और पूरी तरह से पुरानी वसूली पर निर्भर है, जिसका नतीजा अनिश्चित है। ऑडिटर की राय का न मिलना और 'गोइंग कंसर्न' पर संदेह, ये दोनों ही बड़े खतरे के संकेत हैं। निवेशकों को इस कंपनी से बेहद सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।