पूर्व एमडी पर धोखाधड़ी का गंभीर आरोप, कंपनी का कारोबार ठप
Interworld Digital Limited की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कंपनी के ऑडिटर की रिपोर्ट और मैनेजमेंट के स्पष्टीकरण से पता चलता है कि फाइनेंशियल ईयर 2024-2025 कंपनी के लिए बेहद निराशाजनक रहा है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर, मिस्टर मनमोहन गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने धोखाधड़ी से कंपनी के पूरे कारोबार और उसकी बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) को अपनी निजी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया। इस गंभीर आरोप के चलते कंपनी का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और फाइनेंशियल ईयर 2024-2025 के लिए कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू शून्य रहा है। फिलहाल, कंपनी अपने खोए हुए कारोबार को वापस पाने की कोशिश कर रही है।
BSE ने लगाई ट्रेडिंग पर पाबंदी, लिस्टिंग फीस का बकाए का भारी बोझ
ऑपरेशनल तबाही के साथ-साथ, कंपनी गंभीर वित्तीय और नियामक समस्याओं से भी जूझ रही है। Interworld Digital फाइनेंशियल ईयर 2018-19 से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को अपना वार्षिक लिस्टिंग शुल्क (Listing Fees) चुकाने में डिफॉल्टर रही है। इसके परिणामस्वरूप, BSE ने शेयर की ट्रेडिंग पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। अब, जब तक बकाया फीस का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक शेयर की खरीद-बिक्री हर हफ्ते के केवल पहले ट्रेडिंग दिवस पर ही 'ट्रेड-फॉर-ट्रेड' (Trade-for-Trade) आधार पर हो सकेगी। मैनेजमेंट का कहना है कि इस समस्या को दूर करने के लिए फंड की व्यवस्था की जा रही है।
₹1.91 करोड़ का वैधानिक बकाया, 2009 से लंबित
कंपनी की वित्तीय परेशानियां यहीं खत्म नहीं होतीं। उस पर सर्विस टैक्स, टीडीएस (TDS) और प्रोफेशनल टैक्स जैसे वैधानिक बकाया (Statutory Dues) भी ₹1.91 करोड़ हैं, जो फाइनेंशियल ईयर 2009-10 से लंबित चल रहे हैं। इतना ही नहीं, फाइनेंशियल ईयर 2011-12 से सर्विस टैक्स रिटर्न भी फाइल नहीं किए गए हैं। मैनेजमेंट का कहना है कि सर्विस टैक्स का भुगतान योग्य अमाउंट प्रोविजन (Provision) कर दिया गया है और इससे मौजूदा अवधि के प्रॉफिट पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, ऑडिटर ने इस पर लगने वाले संभावित ब्याज या जुर्माने के लिए कोई प्रोविजन नहीं होने की बात कही है।
अन्य वित्तीय मामले और अनिश्चित भविष्य
Company के पास फाइनेंशियल ईयर 2010-11 में बढ़ाई गई अधिकृत पूंजी (Authorized Capital) से संबंधित रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) की फीस के लिए एक आकस्मिक देनदारी (Contingent Liability) भी है। एक रिट याचिका (Writ Petition) कंपनीज एक्ट, 2013 के तहत नई फीस की इस पहले से मौजूद पूंजी वृद्धि पर लागू होने को चुनौती दे रही है।
जहां तक एसेट्स (Assets) की बात है, ऑडिटर ₹1.47 करोड़ के अनकोटेड नॉन-करंट इन्वेस्टमेंट (unquoted non-current investments) के रियलाइजेबल वैल्यू (realizable value) का पता नहीं लगा सका, जिससे इम्पेयरमेंट (impairment) का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। मैनेजमेंट का मानना है कि इनके मूल्य में कोई स्थायी कमी नहीं आई है। इसी तरह, मैनेजमेंट बकाया देनदारों (Debtors) से पूरी वसूली का दावा करता है, इसलिए एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (Expected Credit Loss) के लिए कोई प्रोविजन करने की आवश्यकता नहीं है।
कुल मिलाकर, Interworld Digital का भविष्य बेहद अनिश्चित दिख रहा है। कंपनी के सामने धोखाधड़ी से स्थानांतरित हुए कारोबार और आईपी को वापस पाने, BSE या अन्य निकायों से आगे की नियामक कार्रवाई और लंबित वैधानिक बकायों के भारी वित्तीय बोझ जैसे जोखिम हैं।