Cyber-Fraud: इंदौर के डेवलपर ने बनाए **2,805** फर्जी ऐप्स, **₹150 करोड़** का हुआ महाघोटाला

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Cyber-Fraud: इंदौर के डेवलपर ने बनाए **2,805** फर्जी ऐप्स, **₹150 करोड़** का हुआ महाघोटाला

मुंबई पुलिस ने इंदौर के एक डेवलपर को गिरफ्तार किया है, जिसने **2,805** खतरनाक एंड्रॉइड ऐप्स बनाकर **9,600** से ज्यादा लोगों से **₹150 करोड़** की धोखाधड़ी की। ये ऐप्स सरकारी पोर्टल बनकर लोगों का बैंकिंग डेटा चुराते थे।

कैसे काम करता था यह नेटवर्क?

मुंबई क्राइम ब्रांच ने 36 वर्षीय पंकज गुप्ता को गिरफ्तार किया है, जो इंदौर में एक ग्राफिक डिजाइनर के तौर पर काम करता था। आरोप है कि उसने 2,805 खतरनाक एंड्रॉइड पैकेज किट (APK) फाइलें तैयार की थीं। ये ऐप्स सरकारी पेंशन स्कीम, ट्रैफिक चालान और सीनियर सिटीजन कार्ड वेरिफिकेशन जैसे पोर्टल्स की तरह दिखते थे, जिन्हें बड़ी चतुराई से लोगों को फंसाने के लिए डिजाइन किया गया था।

जांच में पता चला कि यह एक सुनियोजित 'सप्लाई चेन' की तरह चल रहा था। जहां पंकज इन ऐप्स के जरिए ओटीपी (OTP) और बैंक डिटेल्स चुराता था, वहीं बिहार और झारखंड जैसे राज्यों के गिरोह इस जानकारी का इस्तेमाल कर पीड़ितों के खाते खाली कर देते थे। अब तक 9,673 लोग इस जाल में फंस चुके हैं।

बैंकिंग सेक्टर और निवेशकों के लिए चेतावनी

यह मामला भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोनॉमी में बढ़ते 'ऑपरेशनल रिस्क' की तरफ इशारा करता है। जैसे-जैसे लोग मोबाइल बैंकिंग की तरफ बढ़ रहे हैं, बैंकों पर अपनी सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने का दबाव बढ़ गया है। साइबर हमलों को रोकने की लागत और डेटा सुरक्षा के सख्त नियमों के चलते बैंकों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार बैंकों से साइबर-रेसिस्टेंस फ्रेमवर्क को मजबूत करने को कह रहा है। अब निवेशक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि क्या सरकार डिजिटल सुरक्षा को लेकर कोई नई और महंगी गाइडलाइंस जारी करेगी, जिससे बैंकिंग संस्थाओं का खर्च बढ़ सकता है। पुलिस अब उन स्थानीय ऑपरेटरों की तलाश कर रही है जिन्होंने इस गिरोह से ये घातक टूल्स खरीदे थे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.