इंडोनेशिया का $12.94 बिलियन वाला फ्लैगशिप फ्री मील प्रोग्राम भारी दबाव में है। महज एक हफ्ते में 1,700 से ज्यादा लोगों के फूड पॉइजनिंग का शिकार होने के बाद अब सरकार बजट में कटौती और लाभार्थियों की संख्या घटाने की तैयारी कर रही है।
इंडोनेशिया की इस महत्वाकांक्षी फ्री स्कूल मील योजना पर संकट के बादल छा गए हैं। पिछले एक हफ्ते में सेंट्रल जावा और ईस्ट जावा जैसे क्षेत्रों में 1,700 से ज्यादा छात्र और शिक्षक सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए भोजन को खाने के बाद बीमार पड़ गए हैं। यह घटनाक्रम योजना की सुरक्षा और मैनेजमेंट पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
ऑपरेश्नल फेलियर का दायरा
यह कोई इकलौती घटना नहीं है। 'इंडोनेशियन एजुकेशन मॉनिटरिंग नेटवर्क' के डेटा के अनुसार, 2025 से अब तक इस स्कीम से जुड़े 43,000 से ज्यादा फूड पॉइजनिंग के मामले सामने आ चुके हैं। राष्ट्रपति Prabowo Subianto की यह प्रमुख पहल खराब लॉजिस्टिक्स, गलत स्टोरेज और भोजन को ट्रांसपोर्ट करने में लगने वाले लंबे समय जैसी समस्याओं से जूझ रही है। 'नेशनल न्यूट्रिशन एजेंसी' को भी सुस्त रिस्पॉन्स के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
फिस्कल इम्पैक्ट और नीतिगत बदलाव
इन हादसों के बाद सरकार अब इस स्कीम के स्ट्रक्चर को बदलने पर मजबूर है। सरकार योजना को फिर से 'रीफोकस' करने की तैयारी में है, जिसके तहत 80 लाख लाभार्थियों को बाहर किया जा सकता है और सरप्लस किचन का बजट भी कम किया जा सकता है। सप्लाई चेन से जुड़े प्राइवेट कांट्रैक्टर्स के लिए यह पेमेंट में देरी या कॉन्ट्रैक्ट कैंसिलेशन का जोखिम बन गया है। भ्रष्टाचार के आरोपों और वित्तीय गड़बड़ियों के दावों ने इस प्रोजेक्ट की लॉन्ग-टर्म वाएबिलिटी पर भी अनिश्चितता पैदा कर दी है।
अब बाजार और निवेशक इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि सरकार बजट में कितनी कटौती करती है और इसका असर उन हजारों कांट्रैक्टर्स पर क्या पड़ेगा, जो इस पूरी सप्लाई चेन को चला रहे हैं।
