इंडोनेशिया में 'सुपर अल नीनो' के कारण पिछले **11** सालों में सबसे भयानक जंगल की आग भड़क रही है। **10 लाख** से ज्यादा हॉटस्पॉट दर्ज होने से पाम ऑयल की सप्लाई पर संकट गहरा गया है, जिसका सीधा असर भारत की एफएमसीजी कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है।
कमोडिटी सप्लाई चेन पर असर
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा पाम ऑयल उत्पादक है। भारत की बड़ी एफएमसीजी कंपनियां साबुन से लेकर खाने-पीने के सामान बनाने के लिए इसी पाम ऑयल का इस्तेमाल करती हैं। आग और सूखे की स्थिति के कारण पाम ऑयल की खेती और लॉजिस्टिक्स पर बुरा असर पड़ा है। अगर पैदावार में कमी आती है, तो ग्लोबल मार्केट में कच्चे पाम ऑयल (CPO) की कीमतें बढ़ सकती हैं, जो भारतीय कंपनियों के लिए चिंता का विषय है।
मार्जिन पर दबाव का जोखिम
भारतीय कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि अगर इनपुट कॉस्ट बढ़ती है, तो उसे पूरी तरह ग्राहकों पर डालना मुश्किल होगा, क्योंकि भारतीय मार्केट काफी प्राइस-सेंसिटिव है। ऐसे में कंपनियों का नेट प्रॉफिट मार्जिन दबाव में आ सकता है।
आर्थिक और बैंकिंग रिस्क
इंडोनेशिया के रेगुलेटर OJK ने बैंकिंग सेक्टर के लिए 'फिजिकल क्लाइमेट रिस्क' की चेतावनी दी है। आग के कारण कृषि और फॉरेस्ट्री जैसे बड़े उद्योगों में उत्पादन ठप हो गया है, जिससे वहां के बैंकों में एनपीएल (NPLs) यानी बैड लोन बढ़ने का खतरा है। हालांकि भारतीय बैंकों का वहां के कृषि क्षेत्र से सीधा एक्सपोजर कम है, लेकिन ग्लोबल कमोडिटी महंगाई का असर दुनिया भर के निवेशकों पर पड़ सकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आने वाले दिनों में यह आग कितनी जल्दी काबू में आती है, यह देखना अहम होगा। फिलहाल वहां की सरकार ने आग बुझाने के लिए 60,000 जवानों को तैनात किया है। निवेशकों को पाम ऑयल की एक्सपोर्ट कीमतों और भारत में एफएमसीजी कंपनियों के मार्जिन गाइडेंस पर अपनी नजरें बनाए रखनी चाहिए।
