भारत का GCC सेक्टर: 2030 तक ₹7,500 करोड़ से ज़्यादा का वैल्यू रिस्क? जानिए कारण

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत का GCC सेक्टर: 2030 तक ₹7,500 करोड़ से ज़्यादा का वैल्यू रिस्क? जानिए कारण

भारत का ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) सेक्टर एक गंभीर चेतावनी का सामना कर रहा है। PwC इंडिया और FICCI की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अगर टैलेंट की कमी को दूर नहीं किया गया, तो लगभग **$98 अरब** के इस सेक्टर का **19%** वैल्यू 2030 तक खतरे में पड़ सकता है।

क्या है GCC सेक्टर और क्यों है इतना अहम?

भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) मल्टीनेशनल कंपनियों के ग्लोबल ऑपरेशन्स के लिए एक अहम केंद्र के रूप में काम करते हैं। यह सेक्टर नौकरियों और कमर्शियल ऑफिस स्पेस की मांग का एक बड़ा जरिया बन गया है। वर्तमान में, यह सेक्टर 2.36 मिलियन से अधिक प्रोफेशनल्स को रोजगार दे रहा है और 2,100 से अधिक सेंटर्स में फैला हुआ है।

टैलेंट की कमी से इंडस्ट्री को बड़ा झटका

PwC इंडिया और FICCI की रिपोर्ट में बुधवार को कहा गया है कि $98 अरब के इस उद्योग का 19.32% वैल्यू 2030 तक जोखिम में पड़ सकता है, अगर कर्मचारियों के स्किल्स (Skills) में बढ़ती खाई को पाटने में विफलता मिलती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर आज इन स्किल की कमियों को दूर किया जाए, तो इन सेंटर्स के वार्षिक रेवेन्यू में 7.83% की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। इससे ये सेंटर सिर्फ बैक-ऑफिस के काम से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू इनोवेशन और रिसर्च में आगे बढ़ सकते हैं।

ऑपरेशनल देरी और दूसरे देशों में शिफ्ट होने का खतरा

टैलेंट की कमी सिर्फ भविष्य की चिंता नहीं है, बल्कि यह आज के ऑपरेशन्स को भी प्रभावित कर रही है। करीब 59% GCC लीडर्स ने बताया है कि उन्हें नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने या प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में देरी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, 54% का कहना है कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (Digital Transformation) के प्रयासों को बढ़ा नहीं पा रहे हैं, क्योंकि उनके पास इन टेक्नोलॉजीज को बनाने और मैनेज करने के लिए जरूरी स्किल्ड लोग नहीं हैं।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि 11% GCC लीडर्स ने पुष्टि की है कि उनकी पेरेंट कंपनियां (Parent Companies) अपने काम को दूसरे देशों में ट्रांसफर करने पर विचार कर रही हैं या सक्रिय रूप से कर रही हैं। यह दर्शाता है कि यदि भारत सही टैलेंट प्रदान नहीं कर पाता है, तो ग्लोबल कॉर्पोरेशन्स अपने निवेश को अन्य जगहों पर शिफ्ट कर सकते हैं।

लीडरशिप और ऑनबोर्डिंग में गैप

रिपोर्ट लीडरशिप लेयर पर भी प्रकाश डालती है, जहां AI-संचालित भविष्य के लिए तैयारी कम है। सीनियर एग्जीक्यूटिव्स (Senior Executives) में AI लिटरेसी (AI Literacy) औसतन सिर्फ 27% है। बिना लीडरशिप टीम के जो बिजनेस स्ट्रेटेजी (Business Strategy) के लिए AI का उपयोग करना पूरी तरह से समझती हो, इन सेंटर्स के लिए इनोवेट करना या वैल्यू चेन में ऊपर जाना और मुश्किल हो जाता है।

एक नए हायर (Hire) को पूरी तरह प्रोडक्टिव (Productive) बनने में औसतन 8.69 महीने लगते हैं। जैसे-जैसे ग्लोबल बिजनेस की मांग तेज हो रही है, यह लंबा ऑनबोर्डिंग टाइम (Onboarding Time) सेक्टर की फुर्ती पर दबाव डालता है और टीमों के निर्माण की लागत को बढ़ाता है।

निवेशकों के लिए क्या है देखने लायक?

इस इंडस्ट्री का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि यह कितनी जल्दी इन चुनौतियों से निपट पाती है। निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स (Stakeholders) को यह ट्रैक करना चाहिए कि GCCs अपने नए कर्मचारियों को प्रोडक्टिव बनाने में लगने वाले समय को कम करने के लिए आक्रामक अपस्किलिंग प्रोग्राम (Upskilling Programs) लॉन्च कर पाते हैं या नहीं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि हाई-वैल्यू मैंडेट्स (High-value mandates) का मूवमेंट कैसा रहता है; यदि दूसरे देशों में काम ट्रांसफर करने का ट्रेंड तेज होता है, तो यह GCC सेक्टर के विकास को धीमा कर सकता है, जो भारत के ऑफिस रियल एस्टेट (Office Real Estate) और सर्विस एक्सपोर्ट इकोनॉमी (Service Export Economy) का एक प्रमुख स्तंभ रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.