हालिया तिमाही में ग्लोबल IPO मार्केट में भारत की हिस्सेदारी घटकर **0.6%** रह गई है, जो पिछले 6 सालों का सबसे निचला स्तर है। ऐसा मुख्य रूप से SpaceX जैसी बड़ी विदेशी टेक लिस्टिंग के कारण हुआ है, न कि घरेलू गतिविधियों में कमी के कारण।
क्या हुआ?
वैश्विक इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) मार्केट में भारत की भागीदारी जून 2020 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है। हालिया तिमाही में, दुनिया भर की कंपनियों ने IPO के ज़रिए $128.9 बिलियन जुटाए। इसमें भारत का योगदान सिर्फ $831 मिलियन रहा, जो वैश्विक IPO वैल्यू का महज़ 0.6% है। ऐतिहासिक औसत की तुलना में यह एक बड़ी गिरावट है, जिसके चलते वैश्विक बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी 6 साल के निचले स्तर पर पहुँच गई है।
ग्लोबल टेक का असर
इस गिरावट की मुख्य वजह भारतीय कंपनियों की लिस्टिंग में अचानक आई कमी नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल टेक IPOs के विशाल आकार के कारण हुआ है। SpaceX जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय लिस्टिंग ने कुल वैश्विक फंड जुटाने के आंकड़ों पर अपना दबदबा बनाया है। इसने समग्र प्रतिशत हिस्सेदारी को विकृत कर दिया है, जिससे भारत जैसे उभरते बाज़ारों का हिस्सा छोटा दिखने लगा है। इसके अलावा, वैश्विक पूंजी का प्रवाह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़ी कंपनियों की ओर बहुत ज़्यादा केंद्रित है - ऐसे क्षेत्र जहाँ भारत की सीधी भागीदारी फिलहाल सीमित है।
घरेलू परिदृश्य और बाज़ार की सेहत
वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिशत हिस्सेदारी भले ही कम हुई हो, लेकिन बाज़ार के विशेषज्ञों का कहना है कि प्राइमरी मार्केट का स्वास्थ्य सेकेंडरी स्टॉक मार्केट के प्रदर्शन से गहराई से जुड़ा हुआ है। Emkay Global Financial Services के इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के CEO, यतिन सिंह ने बताया कि घरेलू कारक ग्लोबल ट्रेंड्स की तुलना में IPO गतिविधियों को ज़्यादा प्रभावित करते हैं।
आगे देखते हुए, बाज़ार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और जियो प्लेटफॉर्म्स जैसी प्रमुख संस्थाओं के संभावित बड़े IPOs का इंतज़ार कर रहा है, जिनमें से प्रत्येक $3 बिलियन से $4 बिलियन तक जुटाने का लक्ष्य रखता है। ये इवेंट मौजूदा भागीदारी के रुझान को बदल सकते हैं। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान देना चाहिए कि वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारी पूंजी की ज़रूरतें, जिसका अनुमान Morgan Stanley ने 2027 तक सालाना $1 ट्रिलियन तक पहुंचने का लगाया है, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का ध्यान आकर्षित करना जारी रखे हुए हैं।
जोखिम और बाज़ार पर दबाव
हिस्सेदारी में यह गिरावट उभरते बाज़ारों पर व्यापक दबाव को भी दर्शाती है। भारत का प्रमुख ऊर्जा आयातक के रूप में दर्जा स्थानीय बाज़ार को पश्चिम एशिया में संघर्ष जैसी भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशील बनाता है, जो निवेशक की भावना और तरलता को प्रभावित कर सकती हैं। जब वैश्विक निवेशक सतर्क हो जाते हैं, तो वे अक्सर अमेरिका और पूर्वी एशिया के स्थापित बाज़ारों या हाई-ग्रोथ टेक्नोलॉजी क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में IPOs के लिए कम पूंजी बच सकती है।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
भारतीय बाज़ार का आकलन करने वाले निवेशकों के लिए, वैश्विक IPO मार्केट शेयर के बजाय घरेलू संकेतकों पर ध्यान केंद्रित रहना चाहिए। मुख्य निगरानी योग्य बातें इस प्रकार हैं:
- सेकेंडरी मार्केट प्रदर्शन: जैसा कि विशेषज्ञों ने बताया है, एक स्वस्थ सेकेंडरी मार्केट आमतौर पर एक मजबूत IPO पाइपलाइन के लिए एक पूर्व शर्त है।
- आगामी बड़े IPOs: NSE और जियो प्लेटफॉर्म्स जैसी अपेक्षित लिस्टिंग की प्रगति और मूल्यांकन, घरेलू निवेशक की रुचि के महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।
- ऊर्जा और भू-राजनीतिक स्थिरता: चूंकि भारत एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आयातक है, ऊर्जा की कीमतों में स्थिरता और भू-राजनीतिक स्थितियां विदेशी निवेशक की भावना को प्रभावित करना जारी रखेंगी।
- सेक्टोरल एक्सपोज़र: इस बात की निगरानी करना कि भारत डेटा सेंटर और AI-संबंधित सेवाओं में अपनी भूमिका कितनी तेज़ी से बढ़ाता है, क्योंकि ये क्षेत्र वैश्विक निवेश विषयों के लिए अधिक केंद्रीय हो रहे हैं।
