Embassy Group के सपोर्ट वाली कंपनी Embark की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की अगली लहर में मिड-मार्केट कंपनियां बड़ी भूमिका निभाने वाली हैं। अब ये कंपनियां पुराने बैक-ऑफिस मॉडल से हटकर स्पेशलाइज्ड इनोवेशन हब पर फोकस कर रही हैं, जिससे फार्मा, एनर्जी और टेक सेक्टर में नए मौके बन रहे हैं।
बदलता GCC लैंडस्केप
भारत का ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इकोसिस्टम एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब $50 करोड़ से $5 अरब तक की सालाना रेवेन्यू वाली मिड-मार्केट कंपनियां इस ग्रोथ की बागडोर थाम रही हैं। 'Embark' के डेटा से साफ है कि ग्लोबल कंपनियां अब पुराने ढर्रे वाले लेबर-इंटेंसिव बैक-ऑफिस की जगह छोटे और चुस्त (Lean) हब बनाने पर जोर दे रही हैं, जो सीधे ग्लोबल लीडरशिप के साथ जुड़े हों।
बढ़ते आंकड़े और मौके
साल 2024 तक, इन मिड-मार्केट कंपनियों ने भारत में लगभग 480 GCCs संचालित किए, जो कुल मार्केट का करीब 27% हिस्सा हैं। जानकारों के मुताबिक, यह अभी शुरुआत है। 2024 में देश में 1,800 से ज्यादा सेंटर्स थे, जिनके 2030 तक बढ़कर 2,400 से 5,000 के बीच पहुंचने का अनुमान है।
नई रणनीतियां और चुनौतियां
2025 में Deloitte India और Embark के बीच हुई पार्टनरशिप इस दिशा में एक बड़ा कदम है, जो नई कंपनियों को भारत में ऑपरेशन सेटअप करने के लिए एंड-टू-एंड सॉल्यूशंस दे रही है। हालांकि, राह आसान नहीं है। ऑर्गनाइजेशनल डिजाइन, सरकारी नियमों का पालन (Compliance) और स्पेशलाइज्ड टैलेंट की कमी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 90% से 95% डिमांड अभी भी मुख्य बड़े शहरों में ही केंद्रित है। इन सेंटर्स की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटिव सपोर्ट बनकर न रह जाएं, बल्कि ग्लोबल इनोवेशन में असल योगदान दें।
