भारत के ट्रैवल मार्केट में एक बड़ा बदलाव आया है। अब हॉलिडे रेंटल (विलास और होमस्टे) की लिस्टिंग ब्रांडेड होटलों की कुल क्षमता से कहीं ज्यादा हो गई है। बढ़ते ट्रैवल डिमांड और होटल सप्लाई की कमी के बीच यह सेक्टर तेजी से अपनी जगह बना रहा है।
भारत के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में एक बुनियादी बदलाव देखने को मिल रहा है। विला, होमस्टे और सर्विस अपार्टमेंट जैसे हॉलिडे रेंटल अब पारंपरिक ब्रांडेड होटलों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं। साल 2026 तक, इस सेक्टर में 2,00,000 से ज्यादा डिजिटल लिस्टिंग हो चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में 26% की जबरदस्त ग्रोथ दिखाती है। हैरत की बात यह है कि इनकी कुल क्षमता भारत के पूरे ब्रांडेड होटल इन्वेंट्री (लगभग 2,13,000 कमरे) से दोगुनी हो गई है।
क्यों बढ़ रही है लोकप्रियता?
इस बदलाव की मुख्य वजह होटल इंडस्ट्री में सप्लाई और डिमांड का असंतुलन है। बड़ी होटल चेन नए प्रोजेक्ट्स तो घोषित कर रही हैं, लेकिन जमीन अधिग्रहण, ऊंची लागत और प्रोजेक्ट में देरी की वजह से निर्माण की रफ्तार धीमी है। ऐसे में ट्रैवलर्स अब होटलों के बजाय वैकल्पिक ठिकानों की ओर रुख कर रहे हैं।
प्रोफेशनल मैनेजमेंट की ओर कदम
अब यह सेक्टर 'हॉबी होस्ट' मॉडल से निकलकर प्रोफेशनल स्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहा है। ऑपरेटर्स अब पूरी प्रॉपर्टीज को मैनेज कर रहे हैं, जिससे हाउसकीपिंग और मेंटेनेंस जैसी सुविधाएं भी होटल जैसी मिलने लगी हैं। अनुमान है कि यह आंकड़ा FY28 तक 2,85,000 यूनिट्स तक पहुंच सकता है।
रिस्क और चुनौतियां
तेजी के बावजूद, इस सेक्टर के सामने कुछ बड़े खतरे भी हैं। इनमें सबसे बड़ी चिंता रेगुलेटरी नियमों (जैसे फायर सेफ्टी, जोनिंग कानून) को लेकर है। होटलों की तरह यहां कड़े नियम नहीं हैं, जो कभी भी सरकारी बदलावों के बाद समस्या बन सकते हैं। साथ ही, लक्जरी मार्केट में ओवर-सप्लाई का रिस्क बना हुआ है। अब इन्वेस्टर्स की नजर इस बात पर है कि ये ऑपरेटर्स तेजी के साथ अपनी क्वालिटी कैसे बरकरार रखते हैं और टियर-2 और टियर-3 शहरों में कैसा प्रदर्शन करते हैं।
