भारत की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर खर्च होने वाली राशि में गिरावट आई है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब सरकार इन धरोहरों को पर्यटन का केंद्र बनाने पर जोर दे रही है। इस फंड की कमी से विदेशी पर्यटकों की वापसी में भी मुश्किलें आ सकती हैं।
क्या ऐतिहासिक स्थलों पर छाए संकट के बादल?
भारत की ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के सरकारी इरादों पर अब फंड की कमी का साया मंडराने लगा है। एक तरफ जहां सरकार देश को ग्लोबल टूरिज्म हब बनाने की मुहिम चला रही है, वहीं दूसरी ओर संरक्षित स्मारकों के रखरखाव और संरक्षण पर होने वाले खर्च में कमी देखी जा रही है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पर्यटन सेक्टर अभी भी कोरोना महामारी से पहले के स्तर पर लौटने के लिए संघर्ष कर रहा है।
आंकड़ों में गिरावट
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के आंकड़ों के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2024 (FY24) में संरक्षण पर खर्च ₹444 करोड़ के शिखर पर पहुंचने के बाद, अब यह राशि लगातार घट रही है। इसका असर देश के कुछ सबसे प्रतिष्ठित स्थलों पर भी दिख रहा है, जो घरेलू और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- आगरा (ताजमहल): FY24 में ₹24 करोड़ से घटकर अब ₹16 करोड़ कर दिया गया है।
- अजंता-एलोरा गुफाएं (औरंगाबाद): आवंटन ₹27 करोड़ से गिरकर ₹11 करोड़ हो गया है।
- हम्पी: यहां भी फंड ₹12 करोड़ से घटकर ₹9 करोड़ रह गया है।
बजट का अधूरा इस्तेमाल चिंता का सबब
फंड में यह कटौती पर्यटन मंत्रालय के सामने योजनाओं के क्रियान्वयन की एक बड़ी चुनौती को उजागर करती है। FY26 के लिए मंत्रालय का बजट ₹2,541.06 करोड़ है, लेकिन मंत्रालय का फंड इस्तेमाल करने का रिकॉर्ड हमेशा धीमा रहा है। अतीत में, मंत्रालय अपने कुल आवंटित फंड का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही खर्च कर पाता है, जिससे महत्वपूर्ण परियोजनाओं के रखरखाव और विकास में देरी होती है।
पर्यटक संख्या बढ़ी, कमाई घटी?
एक और चिंताजनक बात यह है कि स्मारकों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या और उनसे होने वाली कमाई के बीच एक बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। ASI द्वारा प्रबंधित 143 धरोहर स्थलों पर FY24 में पर्यटकों की संख्या में लगभग 19% की वृद्धि हुई, लेकिन पिछले पांच वर्षों में टिकटों से होने वाली आय में लगभग 3% की गिरावट आई है। यह दर्शाता है कि भले ही पर्यटक स्थलों पर आ रहे हैं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर उस संख्या को प्रभावी ढंग से आय में बदलने में नाकामयाब रहा है। संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं में लगातार निवेश के बिना, इन स्थलों को प्रीमियम डेस्टिनेशन बनाए रखना मुश्किल होगा।
भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां
सरकार ने 2026-27 के बजट में लोथल, धोलावीरा और राखीगढ़ी जैसे 15 प्रतिष्ठित पुरातात्विक स्थलों को अनुभवात्मक सांस्कृतिक गंतव्यों के रूप में विकसित करने की योजना की घोषणा की है। इस रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मंत्रालय इन नए सर्किटों के निर्माण को 3,688 मौजूदा संरक्षित स्मारकों के रखरखाव के साथ कैसे संतुलित करता है। निवेशकों और हितधारकों को यह देखना होगा कि क्या मंत्रालय अपने खर्च की दक्षता में सुधार कर पाता है और क्या नई पर्यटन पहलें प्रति आगंतुक उच्च राजस्व में बदल पाती हैं।
