भारत में Exotic Pet यानी विदेशी पालतू जानवरों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। 2024 में यह करीब $42.6 मिलियन डॉलर का था, और 2030 तक इसके $75.8 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, इस बिजनेस में नियमों की कमी, अवैध तस्करी और इंसानों में बीमारियों के फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है।
क्या हुआ है?
भारत में Exotic Pet यानी विदेशी पालतू जानवरों का बाजार अब एक बड़ा इंडस्ट्री बन चुका है। 2024 में इसका मूल्य करीब $42.6 मिलियन डॉलर आंका गया है। अनुमान है कि 2030 तक यह $75.8 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो हर साल 10.2% की दर से बढ़ रहा है। इस ग्रोथ की मुख्य वजह शहरों में Exotic Animals जैसे सरीसृप (reptiles), पक्षी, स्तनधारी (mammals) और इनवर्टिब्रेट्स (invertebrates) को स्टेटस सिंबल के तौर पर पालने की बढ़ती मांग है। लेकिन, इस बिजनेस में बड़े कानूनी और रेगुलेटरी गैप्स भी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां合法 (legal) बिजनेस, अवैध तस्करी और संगठित अपराध के तार आपस में जुड़े हुए हैं।
कानूनी और रेगुलेटरी पहलू
भारत का मौजूदा कानून, खासकर Wildlife (Protection) Act, 1972, इस बढ़ते सेक्टर के सामने चुनौती पेश कर रहा है। CITES-लिस्टेड प्रजातियों को लेकर कुछ संशोधन हुए हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी जानवरों की खरीद-फरोख्त, ब्रीडिंग और उनकी ट्रेसिबिलिटी (traceability) को लेकर कोई ठोस राष्ट्रीय पॉलिसी नहीं है। ब्रीडर लाइसेंस और स्पष्ट ट्रैकिंग सिस्टम की कमी की वजह से, जंगली जानवरों को भी कभी-कभी合法 माने जाने वाले कैप्टिव-ब्रेड स्टॉक में मिला दिया जाता है। इस पारदर्शिता की कमी के कारण अधिकारियों के लिए सख्ती करना मुश्किल हो जाता है।
इकोलॉजिकल और पब्लिक हेल्थ रिस्क
बिजनेस और कानूनी मुद्दों के अलावा, यह व्यापार भारत के मूल वन्यजीवों (native biodiversity) और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करता है। Alligator Gar और Green Iguana जैसी आक्रामक विदेशी प्रजातियों (invasive alien species) काIntroduction स्थानीय इकोसिस्टम के लिए खतरा है, क्योंकि ये प्रजातियां मूल प्रजातियों की जगह ले सकती हैं। इसके अलावा, Exotic Animal Cafes और Petting Zoos की बढ़ती पॉपुलैरिटी की वजह से Zoonotic Diseases (जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियां) का खतरा भी बढ़ गया है। Salmonella, Avian Influenza, और Chlamydia psittaci जैसे पैथोजन, जानवरों के सीधे संपर्क में आने से इंसानों में फैल सकते हैं, खासकर जब पशु चिकित्सा जांच और जानवरों की देखभाल के मानक अपर्याप्त हों।
तस्करी के रूट और एनफोर्समेंट की चुनौतियां
भारत की भौगोलिक स्थिति अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी का एक अहम ट्रांजिट पॉइंट है। कमजोर सीमाएं और बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे इसके मुख्य हब हैं। Chennai, Bengaluru, और Mumbai जैसे शहरों को दक्षिण पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से आने वाले जानवरों के लिए ट्रांजिट और री-डिस्ट्रीब्यूशन के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचाना गया है। अवैध गतिविधियों में वृद्धि की पुष्टि सीजर (seizures) से होती है; उदाहरण के लिए, WWF-India ने 2022 में ही लगभग 4,000 जानवरों से जुड़े 56 अलग-अलग सीजर की घटनाओं को दर्ज किया। अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती जब्त किए गए जीवित जानवरों का प्रबंधन करना है, क्योंकि मौजूदा रेस्क्यू सेंटर और चिड़ियाघरों में अक्सर उन्हें रखने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते हैं।
आगे क्या देखना होगा?
इस सेक्टर पर नजर रखने वालों के लिए, मुख्य फोकस सरकार की ओर से एक मजबूत राष्ट्रीय ढांचा बनाने की दिशा में संभावित कार्रवाई पर रहेगा। निवेशकों और हितधारकों को स्टैंडर्ड ब्रीडर लाइसेंसिंग, अनिवार्य ट्रेसिबिलिटी की आवश्यकताएं, और आक्रामक प्रजातियों के लिए अधिक कठोर जोखिम मूल्यांकन जैसे डेवलपमेंट पर नजर रखनी चाहिए। रेगुलेशन में कोई भी सख्ती या ट्रांजिट हब पर एनफोर्समेंट में वृद्धि इस व्यापार की इकोनॉमिक्स को बदल सकती है, जो इस क्षेत्र में वर्तमान में काम कर रहे व्यवसायों की व्यवहार्यता को प्रभावित कर सकती है।
