संसद ने परीक्षा धोखाधड़ी पर नकेल कसने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल 2026 पास कर दिया है, जिसमें **₹5 करोड़** तक के जुर्माने का प्रावधान है। नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक नई टास्क फोर्स नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े बदलाव लाने की तैयारी में है। ये ढांचागत बदलाव AI-संचालित टेस्टिंग की ओर एक बड़ा कदम बताते हैं, जिसका असर एड-टेक फर्मों और कोचिंग इंडस्ट्री पर पड़ सकता है।
परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव!
देश में परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाल ही में संसद ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस) अमेंडमेंट बिल, 2026' को मंजूरी दे दी है। इस नए कानून के तहत, परीक्षा में किसी भी तरह की धोखाधड़ी, पेपर लीक या संगठित गिरोह का पर्दाफाश करने वालों को 5 साल तक की जेल और ₹5 करोड़ तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। यह कड़े कदम परीक्षा प्रणाली में व्याप्त नकल और धांधली को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।
NTA में आएंगे बड़े सुधार
सिर्फ सज़ा सुनाना ही काफी नहीं, सरकार अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भी पूरी तरह से बदलने की तैयारी में है। Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो NTA के ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन लाएगी। यह टास्क फोर्स K. राधाकृष्णन कमेटी की 101 सिफारिशों पर काम करेगी, जिसमें डिजिटल प्रश्न पत्र वितरण प्रणाली और बायोमेट्रिक पहचान जैसी तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया है।
टेक्नोलॉजी और कोचिंग का भविष्य
इन सुधारों से एजुकेशन टेक्नोलॉजी (EdTech) कंपनियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। सरकार अब पेपर-आधारित परीक्षाओं की जगह AI-संचालित, कंप्यूटर-आधारित और डिजिटल टेस्टिंग पर ध्यान केंद्रित करेगी। ऐसे में, सुरक्षित डिजिटल असेसमेंट टूल, रिमोट प्रॉक्टरिंग और बायोमेट्रिक पहचान प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाली IT और एड-टेक कंपनियों को सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स मिल सकते हैं।
दूसरी ओर, पारंपरिक कोचिंग सेंटरों के लिए यह एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। अभी तक भारतीय परीक्षा प्रणाली रटने पर ज्यादा जोर देती है, जिसने करोड़ों की कोचिंग इंडस्ट्री को खड़ा किया है। अगर नई टास्क फोर्स मूल्यांकन के तरीकों को बदलकर प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स पर जोर देती है, तो कोचिंग सेंटरों को भी अपने बिजनेस मॉडल को बदलना पड़ सकता है और सिर्फ 'रट्टा मारने' की बजाय वास्तविक कौशल-आधारित शिक्षा पर ध्यान देना होगा।
जोखिम और आगे की राह
हालांकि, इन आधुनिकीकरण के प्रयासों के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। भारत में शिक्षा प्रणाली में आपूर्ति-मांग का भारी अंतर है, जो छात्रों पर अत्यधिक दबाव डालता है और नकल करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है। जानकारों का मानना है कि केवल तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि संस्थागत ईमानदारी और प्रभावी कार्यान्वयन भी महत्वपूर्ण होगा।
अब सबकी निगाहें नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स के रोडमैप पर टिकी हैं। AI-संचालित निगरानी कब और किस पैमाने पर लागू होगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इससे शिक्षा सेवाओं और टेक्नोलॉजी परिदृश्य पर गहरा असर पड़ेगा।
