India’s Disaster Warning Gap: तकनीक तो मजबूत, पर तैयारी में फिसड्डी भारत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India’s Disaster Warning Gap: तकनीक तो मजबूत, पर तैयारी में फिसड्डी भारत

Lloyd’s Register Foundation की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में **84%** लोगों तक आपदा की चेतावनी पहुंचती है, लेकिन सिर्फ **40%** लोग ही उस पर अमल कर पाते हैं।

भारत का आपदा प्रबंधन सिस्टम एक अजीब पहेली में फंसा हुआ है। समस्या अलर्ट भेजने की तकनीक में नहीं, बल्कि लोगों की उस पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता में है। Lloyd’s Register Foundation की रिपोर्ट बताती है कि भले ही भारत 84% लोगों तक चेतावनी पहुंचाने के मामले में वैश्विक औसत (80%) से आगे हो, लेकिन उस पर एक्शन लेने के मामले में हम काफी पीछे हैं। वैश्विक स्तर पर 64% लोग अलर्ट मिलते ही बचाव के इंतजाम कर लेते हैं, जबकि भारत में यह आंकड़ा सिर्फ 40% है।

क्यों है यह एक बड़ी चुनौती?

यह 'Warning-Action Divide' देश के लिए बड़ा आर्थिक और सामाजिक जोखिम है। हमारे पास चेतावनी देने का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तो है, लेकिन जमीनी स्तर पर लचीलापन (resilience) गायब है। रिपोर्ट के अनुसार, केवल 21% भारतीय घरों में कोई ठोस आपदा सुरक्षा योजना (disaster safety plan) मौजूद है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन घरों में पहले से योजना तैयार होती है, वहां अलर्ट मिलते ही कार्रवाई करने की संभावना 4 गुना ज्यादा बढ़ जाती है।

सरकारी भरोसे का दूसरा पहलू

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय जनता का सरकारी तंत्र पर भरोसा बहुत गहरा है। लगभग 63% लोग आपदा तैयारी को लेकर सरकार पर विश्वास करते हैं, जो 53% के वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। लेकिन, सिस्टम पर यह अति-निर्भरता लोगों को व्यक्तिगत तैयारी करने से रोक रही है। साल 2023 के मुकाबले लोगों की व्यक्तिगत एजेंसी (personal agency) में 26% की गिरावट आई है, जो चिंता का विषय है।

आने वाले समय में United Nations के 2027 तक वैश्विक अर्ली वार्निंग सिस्टम के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिर्फ तकनीक काफी नहीं होगी। जब तक आम नागरिक को आपदा के समय खुद बचाव करने के तरीके और उपकरण नहीं सिखाए जाएंगे, तब तक सरकार पर रिकवरी का आर्थिक बोझ बढ़ता रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.