Indian Textile Sector: मुनाफे में **34%** का तूफानी उछाल, सेक्टर में लौटी रौनक

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Textile Sector: मुनाफे में **34%** का तूफानी उछाल, सेक्टर में लौटी रौनक

भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों के लिए फाइनेंशियल ईयर **2027** की पहली तिमाही शानदार रही है। ग्लोबल डिमांड बढ़ने और कॉटन पर इंपोर्ट ड्यूटी हटने से ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में **34%** की बड़ी बढ़त दर्ज की गई है।

मुनाफे में बड़ी छलांग

टेक्सटाइल सेक्टर में सुस्ती का दौर खत्म हो गया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, 21 प्रमुख टेक्सटाइल कंपनियों का एग्रीगेट ऑपरेटिंग प्रॉफिट यानी EBITDA 34% बढ़कर ₹3,270 करोड़ पर पहुंच गया है। वहीं, रेवेन्यू में भी 18% का इजाफा हुआ है और यह ₹27,000 करोड़ रहा। पिछले साल के मुकाबले यह एक बड़ी रिकवरी है।

किन वजहों से आई तेजी?

  • इंपोर्ट ड्यूटी में राहत: सरकार द्वारा कॉटन पर 11% इंपोर्ट ड्यूटी हटाने से रॉ मटेरियल की लागत कम हुई है और मार्जिन बेहतर हुआ है।
  • कॉटन यार्न: मार्केट में कॉटन यार्न की कीमतें स्थिर हुई हैं, और प्राइस स्प्रेड $0.90 प्रति किलो तक पहुंच गया है, जो पहले $0.60–$0.70 के दायरे में था।
  • Vardhman Textiles, Welspun Living, और Arvind जैसे बड़े प्लेयर्स ने 36% से 45% तक प्रॉफिट ग्रोथ दिखाई है।
  • बदलता ग्लोबल सेंटीमेंट: बांग्लादेश और वियतनाम की जगह अब ग्लोबल कंपनियां भारत को प्राथमिकता दे रही हैं। PLI स्कीम और यूके-यूरोपीय यूनियन के साथ संभावित ट्रेड डील से भी माहौल सकारात्मक है।

निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks)

सब कुछ अच्छा नहीं है। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण लॉजिस्टिक्स का संकट गहरा गया है। शिपिंग रूट लंबे होने से डिलीवरी में 15–20 दिन की देरी हो रही है, जिससे फ्रेट कॉस्ट 40% से 60% तक बढ़ गई है। इसके चलते कंपनियों का वर्किंग कैपिटल अटक रहा है, जिसका सीधा असर आने वाली तिमाहियों के कैश फ्लो पर पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.