नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने भारतीय-तमिल मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद् नवी पिल्लई को 2026 के प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान किया है। यह सम्मान उनके मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में दिए गए ऐतिहासिक योगदान के लिए दिया गया है।
मानवाधिकारों की रक्षा और वैश्विक स्तर पर न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करने वालीं नवी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने उनके अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति समर्पण और अपराधियों को जवाबदेह ठहराने के साहसिक प्रयासों को सलाम किया है।
वैश्विक स्तर पर प्रभाव
पिल्लई का करियर अत्यंत प्रभावशाली रहा है। 2008 से 2014 के बीच उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) की उच्चायुक्त के रूप में हाशिए पर खड़े लोगों के अधिकारों के लिए जोरदार आवाज उठाई। उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ 1967 में आया था, जब उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेदी कानूनों (Apartheid) को चुनौती देने वाले कार्यकर्ताओं का बचाव किया था।
न्याय के क्षेत्र में मिसाल
इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल फॉर रवांडा की अध्यक्ष के रूप में उन्होंने वैश्विक कानून व्यवस्था को नई दिशा दी। उन्होंने यौन हिंसा और दुष्प्रचार को नरसंहार के सबूत के तौर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने युद्ध अपराधों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही को मजबूत किया।
हाल के वर्षों में, उन्होंने म्यांमार नरसंहार मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में एड हॉक जज के तौर पर और 2021-2025 के दौरान फिलिस्तीनी क्षेत्र में UN जांच आयोग की अध्यक्षता की। इस पुरस्कार के तहत उन्हें 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर की राशि प्रदान की जाएगी, जिसका वितरण 10 दिसंबर 2026 को ओस्लो में होगा। यह एक मानवीय और कूटनीतिक उपलब्धि है, जिसका किसी भी वित्तीय बाजार या स्टॉक पर कोई प्रभाव नहीं है।
