Indian Navy ने ऑपरेशन संकल्प के तहत MV Union Mariner और MV Dagher जैसे मर्चेंट जहाजों को सुरक्षित रूप से Bab-el-Mandeb Strait से बाहर निकाला है। क्षेत्र में जारी तनाव से ग्लोबल शिपिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए लागत बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।
भारतीय नौसेना ने हाल ही में MV Union Mariner और MV Dagher जैसे कमर्शियल जहाजों को Bab-el-Mandeb Strait से सुरक्षित निकालने का ऑपरेशन पूरा किया। यह इलाका रेड सी, गल्फ ऑफ अदन और इंडियन ओशन को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट' है, जो भारत की एनर्जी और कंज्यूमर गुड्स सप्लाई चेन के लिए बेहद अहम है।
बिजनेस और लॉजिस्टिक्स पर असर
इन्वेस्टर्स के लिए इस क्षेत्र की अस्थिरता चिंता का विषय है। तनाव बढ़ने का सीधा असर शिपिंग लाइन्स के ऑपरेटिंग मार्जिन्स पर पड़ता है, क्योंकि उन्हें 'वॉर रिस्क सरचार्ज' (War Risk Surcharge) और ऊंचे इंश्योरेंस प्रीमियम का सामना करना पड़ता है। यदि जहाजों को रास्ता बदलना पड़ता है, तो ईंधन की खपत बढ़ती है और देरी के कारण सप्लाई चेन में भारी व्यवधान आ सकता है, जिसका सीधा असर लॉजिस्टिक्स सेक्टर के शेयरों पर दिखाई देता है।
जोखिम का माहौल
अगस्त 2026 में समुद्री सुरक्षा की स्थिति काफी नाजुक रही है। हाल ही में MSV Faize Noore Oliya जहाज के डूबने और अपहरण की बढ़ती खबरों ने खतरे को और बढ़ा दिया है। हालांकि भारतीय नौसेना की उपस्थिति से एक सुरक्षा घेरा बना हुआ है, लेकिन बढ़ता भू-राजनीतिक (Geopolitical) रिस्क आने वाले समय में शिपिंग कंपनियों की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए एक चुनौतीपूर्ण फैक्टर बना रहेगा। निवेशकों को कंपनियों की कमेंट्री और फ्रेट कॉस्ट इंडेक्स पर करीबी नजर रखनी चाहिए।
