भारतीय शेयर बाज़ारों ने आज स्थिरता दिखाई, निफ्टी (Nifty) 50 इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ 24,624 पर बंद हुआ। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट को **5.25%** पर अपरिवर्तित रखा है। निवेशकों ने केंद्रीय बैंक द्वारा FY27 के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को **6.7%** तक बढ़ाए जाने का स्वागत किया, हालांकि भू-राजनीतिक चिंताएं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने ट्रेडिंग को रेंज-बाउंड रखा।
बाज़ार में दिखी सतर्कता, RBI ने थामे रखे रेट्स
5 अगस्त 2026 को भारतीय इक्विटी बाज़ार में दिनभर की ट्रेडिंग सतर्कता के साथ स्थिर प्रदर्शन के साथ समाप्त हुई। निफ्टी 50 इंडेक्स में 0.04% की मामूली बढ़त देखी गई और यह 24,624.65 पर बंद हुआ। वहीं, BSE सेंसेक्स 0.19% चढ़कर 78,581.00 पर रहा। बाज़ार में अस्थिरता बनी रही क्योंकि निवेशकों ने सकारात्मक मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतकों को वैश्विक अनिश्चितताओं के साथ संतुलित किया।
RBI का बड़ा ऐलान: रेपो रेट स्थिर, GDP ग्रोथ का अनुमान ऊपर
दिन का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का नीतिगत निर्णय रहा। केंद्रीय बैंक ने अपने रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखा और अपनी न्यूट्रल पॉलिसी की स्थिति को बरकरार रखा। हालांकि दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय काफी हद तक अपेक्षित था, RBI ने FY27 के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को पिछले 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया, जिससे बाज़ार की धारणा को बल मिला। यह बाहरी दबावों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था के लचीलेपन में विश्वास को दर्शाता है।
बैंकिंग शेयरों में गिरावट, VIX रहा शांत
जहां ब्रॉडर मार्केट्स में हल्की बढ़त देखी गई, वहीं बैंकिंग सेक्टर में कुछ कमजोरी आई। बैंक निफ्टी इंडेक्स ब्रॉडर मार्केट से पिछड़ गया और 167.25 अंक यानी 0.29% गिरकर 57,739.95 पर बंद हुआ। यह गिरावट बताती है कि नीतिगत घोषणा के बाद कुछ निवेशकों ने बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली की। इंडिया VIX (Volatility Index) लगभग 12.01 पर शांत रहा, जो दर्शाता है कि सतर्कता तो है, लेकिन घबराहट वाली बिकवाली हावी नहीं हुई है।
वैश्विक जोखिमों का साया बरकरार
घरेलू स्तर पर ग्रोथ को लेकर सकारात्मकता के बावजूद, बाहरी जोखिम निवेशक की धारणा पर दबाव बनाए हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, जो $80 प्रति बैरल के निशान की ओर वापस आने लगी हैं, भारत के आयात बिल और महंगाई के दृष्टिकोण के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसके अलावा, निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनावों पर भी बारीकी से नज़र रख रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे प्रमुख व्यापार मार्गों में व्यवधान की संभावना अनिश्चितता की एक परत जोड़ती है, जो अक्सर बाज़ार सहभागियों को सतर्क करती है।
आगे की राह: वैश्विक संकेतों पर नज़र
आगे चलकर, बाज़ार का ध्यान इन वैश्विक संकेतों पर केंद्रित रहने की संभावना है। जबकि GDP में बढ़ोतरी एक स्थिर फंडामेंटल पृष्ठभूमि प्रदान करती है, कॉर्पोरेट आय प्रदर्शन, वैश्विक कच्चे तेल की अस्थिरता और भू-राजनीतिक विकास के बीच की परस्पर क्रिया सूचकांकों की अगली दिशा तय करेगी। निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि क्या बाज़ार मौजूदा सपोर्ट लेवल से ऊपर अपनी स्थिति बनाए रख पाता है या आने वाले सत्रों में अंतर्राष्ट्रीय दबावों से अधिक महत्वपूर्ण समेकन होता है।
