Indian Markets Dip as July CPI Hits 4.45%; Apollo Hospitals Rises

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Markets Dip as July CPI Hits 4.45%; Apollo Hospitals Rises

भारतीय शेयर बाजार में आज गिरावट देखी गई। जुलाई के लिए खुदरा महंगाई दर बढ़कर **4.45%** हो गई, जो पिछले 19 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, अपोलो हॉस्पिटल्स के शेयर तिमाही मुनाफे में **34%** की बढ़ोतरी के बाद चढ़े, लेकिन सीमेंट और मेटल शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव बना रहा।

महंगाई का असर, बाजार में गिरावट

आज शेयर बाजार की शुरुआत नरमी के साथ हुई। BSE Sensex और NSE Nifty50 दोनों ही गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। इस नरमी की मुख्य वजह जुलाई महीने के लिए 4.45% पर पहुंची खुदरा महंगाई दर (CPI) है, जो पिछले 19 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इस बढ़त ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है कि बढ़ती कीमतों का अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।

अपोलो हॉस्पिटल्स की चमक

बाजार की गिरावट के बीच हेल्थकेयर सेक्टर में अपोलो हॉस्पिटल्स (Apollo Hospitals) ने शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद इसके शेयर में तेजी देखी गई। अपोलो हॉस्पिटल्स ने पहली तिमाही (FY27) में 34.2% की सालाना वृद्धि के साथ ₹581 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इस मजबूत नतीजे ने शेयर को बाजार के रुझान से बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की।

सीमेंट और मेटल शेयरों पर दबाव

दूसरी ओर, सीमेंट और मेटल सेक्टर में बिकवाली का दबाव दिखा। UltraTech Cement और Grasim Industries जैसे प्रमुख शेयर गिरावट में थे। सीमेंट सेक्टर में कमजोरी की एक वजह UltraTech Cement के शेयरों से जुड़ा एक बड़ा ब्लॉक डील (Block Deal) भी रही, जिसमें Pilani Investment की हिस्सेदारी थी। इसी तरह, Hindalco Industries जैसी कंपनियों के नेतृत्व वाला मेटल इंडेक्स भी दबाव में रहा, क्योंकि वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर जारी रहा।

ग्लोबल फैक्टर्स का भी असर

बाजार की अस्थिरता में कुछ व्यापक आर्थिक कारक भी भूमिका निभा रहे हैं। खासकर अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। भारत एक प्रमुख तेल आयातक देश होने के नाते इन कीमतों के प्रति संवेदनशील है, क्योंकि ऊर्जा लागत बढ़ने से कंपनियों के लॉजिस्टिक्स और परिचालन खर्च बढ़ सकते हैं।

आगे चलकर, निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रुख पर नजर रखेंगे कि वह ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों के कॉर्पोरेट नतीजों में मजबूती दिख रही है, लेकिन बढ़ती लागत और उपभोक्ता मांग के बीच तालमेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.