FD और Gold को छोड़कर अब इन Assets में पैसा लगा रहे हैं भारतीय निवेशक!

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AuthorAditya Rao|Published at:
FD और Gold को छोड़कर अब इन Assets में पैसा लगा रहे हैं भारतीय निवेशक!

भारतीय निवेशक अब प्रॉपर्टी और गोल्ड जैसी पारंपरिक जगहों से निकलकर फाइनेंशियल एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं। म्यूचुअल फंड AUM **85.76 लाख करोड़** रुपये पार कर गया है और SIP में रिकॉर्ड इनफ्लो दिख रहा है। निवेशक अब स्ट्रक्चर्ड डेट, इंटरनेशनल मार्केट और डिजिटल एसेट्स को भी अपना रहे हैं। हालांकि, इस बदलाव में रेगुलेटरी अनिश्चितता और मार्केट की वोलैटिलिटी जैसे नए जोखिम भी शामिल हैं।

पीढ़ियों से, भारतीय निवेश की रणनीति सीधी-सादी रही है: सुरक्षा के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), भरोसे के लिए फिजिकल गोल्ड और लंबी अवधि की संपत्ति के लिए रियल एस्टेट। लेकिन अब यह पारंपरिक तरीका तेजी से बदल रहा है। डिजिटल पहुंच और बेहतर रिटर्न की तलाश में निवेशक फाइनेंशियल एसेट्स की ओर बढ़ रहे हैं।

इस बदलाव का पैमाना डेटा में साफ दिख रहा है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में जबरदस्त ग्रोथ देखी गई है, जिसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2026 के मध्य तक करीब 85.76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। जुलाई 2026 में 31,961 करोड़ रुपये का मासिक सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) योगदान बताता है कि रिटेल पैसा इक्विटी में अधिक जा रहा है, बजाय कम ब्याज वाले सेविंग अकाउंट में पड़े रहने के।

फिजिकल एसेट्स का फाइनेंशियलाइजेशन

पारंपरिक पसंदीदा चीजें भी अब लिक्विड और एफिशिएंट रूपों में आ रही हैं। फिजिकल गोल्ड की जगह अब गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) ले रहे हैं। इन फंड्स में अगस्त 2026 तक करीब 1.73 लाख करोड़ रुपये का निवेश बढ़ा है। इसी तरह, रियल एस्टेट में सीधा प्रॉपर्टी खरीदने की बजाय स्ट्रक्चर्ड डेट और आरईआईटी (REITs) में दिलचस्पी बढ़ रही है।

निवेश का दायरा बढ़ा

घरेलू इक्विटी और बॉन्ड के अलावा, ग्लोबल और वैकल्पिक निवेश के साधनों की मांग भी बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत बाहर भेजे जाने वाले पैसे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, क्योंकि निवेशक डोमेस्टिक इकोनॉमिक साइकिल्स से बचाव के लिए भौगोलिक विविधीकरण (Diversification) चाहते हैं। इसके अलावा, अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) ने 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिबद्धताएं जुटाई हैं, जिनमें हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और फैमिली ऑफिस के बीच प्राइवेट क्रेडिट और स्ट्रक्चर्ड डेट पर फोकस करने वाली कैटेगरी लोकप्रिय हो रही हैं।

क्रिप्टोकरेंसी भी एक अलग, हालांकि बहुत वोलेटाइल, एसेट क्लास के रूप में उभर रही है। मुख्यधारा में इसकी स्वीकार्यता अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन रिटेल ट्रांजेक्शन वॉल्यूम काफी ज्यादा है।

नए जोखिमों को समझना

जहां विविधीकरण (Diversification) वेल्थ मैनेजमेंट का मुख्य सिद्धांत है, वहीं यह नई चुनौतियां भी खड़ी करता है। एक बड़ी चिंता 'कोरिलेशन क्रीप' (Correlation Creep) है। यह तब होता है जब निवेशक एक जैसे सेक्टर या स्टॉक को ट्रैक करने वाले कई फंड्स या एसेट्स रखते हैं, जिससे उनका पोर्टफोलियो एक मार्केट करेक्शन के प्रति संवेदनशील हो जाता है।

इसके अलावा, नए एसेट क्लास में खास जोखिम होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय निवेश करेंसी के उतार-चढ़ाव और रेमिटेंस पर बदलते रेगुलेटरी कैप्स के अधीन हैं। क्रिप्टो और डिजिटल एसेट्स को महत्वपूर्ण रेगुलेटरी और टैक्स संबंधी अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता है। बैंक डिपॉजिट और सरकारी योजनाओं की सुरक्षा से दूर जाने पर लिक्विडिटी का जोखिम और कैपिटल लॉस की संभावना बढ़ जाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.