Aye Finance & Fractal Analytics IPO: ट्रेड डील के बीच IPO लॉन्च, पर साइज़ हुआ छोटा!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Aye Finance & Fractal Analytics IPO: ट्रेड डील के बीच IPO लॉन्च, पर साइज़ हुआ छोटा!
Overview

माइक्रो-लोन प्रोवाइडर Aye Finance और AI फर्म Fractal Analytics 9 फरवरी को अपना IPO लॉन्च कर रहे हैं, लेकिन दोनों ही कंपनियों को इश्यू साइज़ में काफी कटौती करनी पड़ी है। Aye Finance का IPO अब **₹1,010 करोड़** का होगा, जबकि पहले इसकी योजना **₹1,450 करोड़** की थी। वहीं, Fractal Analytics का ऑफर साइज़ भी पहले के अनुमानों से घटाकर **₹2,834 करोड़** कर दिया गया है। यह कदम दर्शाता है कि मार्केट में अच्छी उम्मीदों के बावजूद वैल्यूएशन को लेकर सतर्कता बनी हुई है।

हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील (Trade Deal) ने भारतीय शेयर बाजारों में एक नया उत्साह पैदा किया है। इस डील के बाद सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) बजट-वाले लोज़ (Budget-day lows) से करीब 5% तक चढ़ गए हैं, जिससे इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग्स (IPOs) के लिए एक शॉर्ट विंडो (Short Window) खुल गई है। हालांकि, यह विंडो कंपनियां ज्यादा से ज्यादा फंड जुटाने के लिए नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल एडजस्टमेंट्स (Practical Adjustments) के साथ IPO लाने का मौका दे रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण Aye Finance और Fractal Analytics के IPOs हैं, जिन्होंने 9 फरवरी को शेयर बिक्री के लिए अपने इश्यू साइज़ (Issue Size) में बड़ी कटौती की है।

वैल्यूएशन पर कसावट, उम्मीदों के बावजूद

Aye Finance का IPO, जो पहले ₹1,450 करोड़ का होने वाला था, अब घटकर ₹1,010 करोड़ कर दिया गया है, जिसमें फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) और ऑफर फॉर सेल (OFS) दोनों को कम किया गया है। इसी तरह, Fractal Analytics ने भी अपने टोटल ऑफरिंग (Total Offering) को पहले के अनुमानों से घटाकर ₹2,834 करोड़ कर दिया है। ये बड़ी कटौती इस बात पर जोर देती है कि प्राइमरी मार्केट (Primary Market) में वैल्यूएशन (Valuation) का दबाव अब भी बना हुआ है।

इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव्स (Industry Executives) का कहना है कि 2025 में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) के ₹1.66 ट्रिलियन के बड़े आउटफ्लो (Outflow) के बाद, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ही भारतीय इक्विटीज़ (Equities) के मुख्य फाइनेंसर (Financier) बने हुए हैं। ऐसे में, कंपनियों को अपनी वैल्यूएशन उम्मीदों पर समझौता करना पड़ रहा है। हालांकि, जनवरी 2026 में एफपीआई (FPI) फ्लो में कुछ सुधार दिखा और लगभग $500 मिलियन का नेट इनफ्लो (Net Inflow) हुआ, लेकिन वे अभी भी सतर्क हैं, जिससे डीआईआई (DIIs) की भूमिका और अहम हो गई है।

जनवरी 2026 मेनबोर्ड आईपीओ (Mainboard IPOs) के लिए अप्रैल 2024 के बाद का सबसे कमजोर महीना रहा, जिसमें केवल 3 डील्स से ₹4,765 करोड़ ही जुटाए जा सके। यह दिखाता है कि प्राइमरी मार्केट में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए वैल्यूएशन में छूट (Valuation Concessions) देना कितना जरूरी है।

सेक्टर-स्पेशफिक वैल्यूएशन और निवेशक का नजरिया

Aye Finance और Fractal Analytics के IPOs दो अलग-अलग ग्रोथ सेक्टर्स को दर्शाते हैं। Aye Finance जैसी माइक्रोफाइनेंस (Microfinance) संस्थानों के सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाले साथियों का पीई (P/E) मल्टीपल (Multiple) आमतौर पर 18x से 25x के बीच रहता है, जो क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) और रेगुलेटरी माहौल (Regulatory Environment) से प्रभावित होता है। वहीं, Fractal Analytics जैसी AI और एनालिटिक्स (Analytics) फर्मों को उनकी स्केलेबिलिटी (Scalability) और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Intellectual Property) के कारण 35x से 50x तक के ऊंचे पीई (PE) मल्टीपल मिल सकते हैं।

लेकिन, हाल के महीनों में मार्केट में रही अच्छी-खासी वोलेटिलिटी (Volatility) के चलते, कंपनियों के लिए इन वैल्यूएशन को सही ठहराना एक बड़ी चुनौती है। निवेशक अब सस्टेनेबल ग्रोथ (Sustainable Growth) और मजबूत फंडामेंटल्स (Fundamentals) को प्राथमिकता दे रहे हैं, जैसा कि 2025 में डीआईआई (DIIs) द्वारा भारतीय इक्विटीज़ में किए गए ₹7.9 ट्रिलियन के निवेश से साफ जाहिर होता है।

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