KPMG-EEMA की एक नई रिपोर्ट बताती है कि अब **54%** से ज़्यादा भारतीय इवेंट्स में भाग लेने के लिए दूसरे शहरों की यात्रा करते हैं। यह ट्रेंड टियर-2 शहरों में **74%** तक पहुंच गया है। इस बदलाव से होटल, ट्रैवल और एविएशन इंडस्ट्री को सीधा फायदा हो रहा है। खास बात यह है कि प्रोफेशनल नेटवर्किंग के लिए होने वाला यह खर्च बढ़ रहा है।
उपभोक्ता व्यवहार में आए इस बदलाव ने भारतीय इवेंट्स इंडस्ट्री को ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए एक बड़ा बूस्टर बना दिया है। KPMG और इवेंट एंड एंटरटेनमेंट मैनेजमेंट एसोसिएशन (EEMA) की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इवेंट में शामिल होने वाले 54.4% से ज़्यादा लोग अब अपने शहर के बाहर से आते हैं। यह ट्रेंड टियर-2 शहरों में ज़्यादा देखने को मिल रहा है, जहाँ 74.2% लोगों ने दूसरे शहरों से यात्रा की, जो टियर-1 शहरों के 45.7% के मुकाबले काफी ज़्यादा है।
इस आवाजाही का आर्थिक असर भी काफ़ी अहम है। रिपोर्ट बताती है कि इवेंट्स पर खर्च किए गए हर ₹1 से ₹2.03 की व्यापक आर्थिक गतिविधि पैदा होती है। इसका मतलब है कि इवेंट-आधारित टूरिज्म होटलों, स्थानीय ट्रांसपोर्ट सेवाओं और रिटेलरों के लिए कमाई का एक स्थिर जरिया बन रहा है, क्योंकि लोग अक्सर इन आयोजनों के इर्द-गिर्द ही अपनी पूरी यात्रा प्लान करते हैं। सर्वे में शामिल 51% से ज़्यादा लोगों के लिए, इवेंट ही यात्रा का मुख्य कारण था, जिससे रहने और यात्रा पर काफ़ी खर्च हुआ।
व्यावसायिक दृष्टिकोण से, यह डेटा ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी और इवेंट मैनेजमेंट सेक्टर में कंपनियों के लिए विकास की एक बड़ी संभावना दिखाता है। प्रोफेशनल नेटवर्किंग (Professional Networking) सबसे बड़ा मोटिवेशन बनकर उभरा है, जिसे 65% प्रतिभागियों ने बताया। यह दर्शाता है कि सिर्फ मनोरंजन वाले इवेंट्स के मुकाबले, बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) इवेंट्स और कॉर्पोरेट गैदरिंग्स ज़्यादा मज़बूत हो सकते हैं और ज़्यादा खर्च करने वाले ग्राहकों को आकर्षित कर सकते हैं।
इन सेक्टर्स पर नज़र रखने वाले निवेशकों को इसके पीछे की आर्थिक निर्भरताओं पर भी ध्यान देना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, यात्रा और इवेंट्स पर होने वाला यह ऐच्छिक खर्च (Discretionary Spending) बाहरी कारकों के प्रति संवेदनशील है। टिकट की कीमतें और समय की कमी, उपस्थिति के लिए मुख्य बाधाएं बताई गई हैं। अगर आर्थिक स्थितियां टाइट होती हैं या इवेंट आयोजकों को परिचालन लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ता है, तो इवेंट्स के लिए यात्रा करने की ग्राहकों की रुचि कम हो सकती है। इसके अलावा, टियर-2 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार एक सकारात्मक कारक है, लेकिन इस ट्रेंड की निरंतर वृद्धि यात्रा की सामर्थ्य और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की इन बिज़नेस और लेज़र यात्रियों की ज़रूरतों को पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
आगे चलकर, मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए मुख्य ध्यान इस बात पर रहेगा कि हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल कंपनियां इन इवेंट्स में शामिल होने वाले यात्रियों की ज़रूरतों के साथ अपनी सेवाओं को कितनी अच्छी तरह से संरेखित करती हैं। कॉर्पोरेट ट्रैवल खर्च के रुझान और क्षेत्रीय हब में बड़े पैमाने पर इवेंट बुकिंग की मात्रा पर नज़र रखने से इस ऐच्छिक खर्च के ट्रेंड की मज़बूती का अंदाज़ा लग सकता है।
