E-commerce Sites: 17,000 अवैध लिस्टिंग पर सरकार की नजर, ई-कॉमर्स कंपनियों की बढ़ सकती है मुश्किल

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AuthorAditya Rao|Published at:
E-commerce Sites: 17,000 अवैध लिस्टिंग पर सरकार की नजर, ई-कॉमर्स कंपनियों की बढ़ सकती है मुश्किल

भारत के प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर लगभग **17,000** अवैध वॉकी-टॉकी की लिस्टिंग पकड़ी गई है। ये डिवाइस प्रतिबंधित फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल कर रहे थे, जो राष्ट्रीय स्पेक्ट्रम कानूनों का सीधा उल्लंघन है।

रेगुलेटरी अथॉरिटीज ने देश के बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर करीब 17,000 ऐसी लिस्टिंग की पहचान की है, जो सरकारी नियमों को ताक पर रखकर बेची जा रही थीं। ये डिवाइस प्रतिबंधित फ्रीक्वेंसी बैंड्स पर काम करते हैं, जो सुरक्षा और स्पेक्ट्रम के लिहाज से खतरनाक हैं। यह मामला ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए एक बड़ी 'कंप्लायंस गैप' को दर्शाता है, जो इन अनधिकृत सामानों के लिए मुख्य गेटवे बन गए हैं।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी (Investor Alert)\n\nनिवेशकों के लिए यह खबर रेगुलेटरी रिस्क का संकेत है। मौजूदा नियमों के तहत, मार्केटप्लेस की जिम्मेदारी है कि वे प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले सामानों की कानूनी वैधता सुनिश्चित करें। इतनी बड़ी तादाद में अवैध उपकरणों का मिलना बताता है कि थर्ड-पार्टी सेलर्स के लिए प्लेटफॉर्म्स की वेरिफिकेशन प्रोसेस कमजोर है। अगर सरकार ने जुर्माने या सख्त कानूनी कार्रवाई का रुख अपनाया, तो कंपनियों पर कंप्लायंस कॉस्ट का बोझ बढ़ना तय है।\n\n### सिर्फ वॉकी-टॉकी ही नहीं, और भी हैं दायरे में\n\nयह समस्या सिर्फ रेडियो तक सीमित नहीं है। वायरलेस माइक्रोफोन, ड्रोन और सिग्नल बूस्टर जैसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों में भी इसी तरह की खामियां मिली हैं। ये प्रोडक्ट अक्सर WPC (वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन) विंग द्वारा निर्धारित मानकों के बिना बाजार में आ जाते हैं।\n\nआने वाले समय में मार्केटप्लेस को अपने सेलर-वेटिंग (Seller-vetting) प्रोसेस को सख्त करना पड़ सकता है, जिससे अस्थायी तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स की वैरायटी कम हो सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन प्लेटफॉर्म्स के प्रति कितनी सख्ती दिखाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.