भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन लिंक्डइन (LinkedIn) की एक नई स्टडी बताती है कि 51% भारतीय C-Suite एग्जीक्यूटिव्स के पास भविष्य की वर्कफोर्स की जरूरतों को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं है। जहां 84% लीडर्स AI को निर्णय लेने में शामिल कर रहे हैं, वहीं अब फोकस केवल प्रोडक्टिविटी से हटकर इनोवेशन पर जा रहा है। यह दिखाता है कि मैनेजमेंट पर स्किल गैप को भरने और AI-संचालित संगठनात्मक बदलावों के लिए तैयार होने का दबाव बढ़ रहा है।
AI के दौर में लीडर्स की अनिश्चितता
भारतीय कॉर्पोरेट जगत इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व्यापार संचालन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। लिंक्डइन (LinkedIn) के हालिया शोध के अनुसार, आधे से अधिक भारतीय एग्जीक्यूटिव्स, यानी 51%, भविष्य में अपने संगठनों के लिए आवश्यक स्किल्स और प्रतिभा को लेकर अनिश्चित हैं। यह रणनीतिक योजना का अभाव ऐसे समय में सामने आया है जब 84% लीडर्स पहले से ही अपने मुख्य व्यावसायिक निर्णयों में AI का उपयोग कर रहे हैं।
प्रमुख कार्यकारी भूमिकाओं में चुनौतियाँ
खासकर मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी फंक्शन का नेतृत्व करने वालों के बीच यह अनिश्चितता अधिक है। लगभग 58% चीफ मार्केटिंग ऑफिसर्स (CMOs) AI-एकीकृत कार्यस्थल के लिए विशिष्ट प्रतिभा आवश्यकताओं के बारे में अनिश्चित होने की रिपोर्ट करते हैं। इसी तरह, CMOs और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर्स (CTOs) दोनों पर AI पहलों को तेजी से स्केल करने का भारी दबाव है, और कई लोग वास्तविक परिणामों को मापने से पहले ही तेजी से आगे बढ़ने की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं। इन वरिष्ठ लीडर्स में से 39% के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जब आगे का रास्ता स्पष्ट न हो तो बड़े दांव वाले निर्णय कैसे लिए जाएं।
इनोवेशन की ओर रणनीतिक बदलाव
कंपनियां अब AI को केवल दक्षता के साधन के रूप में नहीं देख रही हैं। लगभग 90% लीडर्स अब बताते हैं कि इनोवेशन उनके AI खर्च का प्राथमिक लक्ष्य है। इसमें नए उत्पाद बनाने, ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने और विभिन्न व्यावसायिक मॉडल तलाशने के लिए तकनीक का उपयोग करना शामिल है। नतीजतन, भारत की लीडरशिप टीमों की संरचना बदल रही है। मिलेनियल्स अब C-Suite का 55% हिस्सा हैं, और केवल एक उद्योग में अनुभव रखने वाले लीडर्स की संख्या 80% से घटकर 58% हो गई है।
आवश्यक स्किल्स और भविष्य पर नजर
विशिष्ट तकनीकी विशेषज्ञता की मांग बोर्डरूम की आवश्यकताओं को नया आकार दे रही है। भारतीय एग्जीक्यूटिव्स के बीच पांच सबसे तेजी से बढ़ती स्किल्स में से चार सीधे AI से संबंधित हैं, जैसे AI रणनीति, AI एजेंट्स और RAG टेक्नोलॉजी। निवेशकों के लिए, इन परिवर्तनों का दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां इस संक्रमण को कितनी प्रभावी ढंग से प्रबंधित कर पाती हैं। शेयरधारकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण निगरानी यह है कि क्या प्रबंधन टीमें संचालन को बाधित किए बिना या अत्यधिक लागत वृद्धि का सामना किए बिना इन प्रतिभा अंतरालों को पाट सकती हैं। भविष्य में, बाजार संभवतः इस पर नज़र रखेगा कि क्या कंपनियां यह साबित कर सकती हैं कि उनके AI निवेश केवल परिचालन व्यय में वृद्धि के बजाय मापने योग्य नवाचार की ओर ले जा रहे हैं।
