Maritime Reform: 2030 तक 11 बड़े Ports का होगा कॉर्पोरेटाइजेशन, बदलेगी पोर्ट सेक्टर की तस्वीर

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AuthorMehul Desai|Published at:
Maritime Reform: 2030 तक 11 बड़े Ports का होगा कॉर्पोरेटाइजेशन, बदलेगी पोर्ट सेक्टर की तस्वीर

केंद्र सरकार ने अपने पोर्ट सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। सरकार **2030** तक **11** प्रमुख बंदरगाहों (Ports) को कॉर्पोरेट संस्थाओं में बदलने जा रही है, ताकि कामकाज में तेजी आए और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिल सके।

भारत के समुद्री क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का बिगुल बज चुका है। सरकार की योजना के मुताबिक, देश के 12 में से 11 प्रमुख बंदरगाहों को मौजूदा एडमिनिस्ट्रेटिव ढांचे से हटाकर एक कॉर्पोरेट मॉडल में ढाला जाएगा। यह पूरा बदलाव 'लैंडलॉर्ड-पोर्ट सिस्टम' के तहत होगा, जहां जमीन और बुनियादी ढांचा सरकार के पास रहेगा, लेकिन टर्मिनल का संचालन प्राइवेट कंपनियों को लंबी अवधि के करार के जरिए सौंपा जाएगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?

इसका मुख्य उद्देश्य निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी और एफिशिएंसी को बढ़ाना है। पुराने सिस्टम में प्रोजेक्ट अप्रूवल में देरी और टैरिफ फिक्सेशन की जटिलताएं बड़ी बाधा थीं। अब बोर्ड-लेवल पर स्वायत्तता मिलने से पोर्ट्स अपने फैसले खुद ले पाएंगे और बाजार की स्थितियों के अनुसार रेट तय कर सकेंगे। इससे 'टैरिफ अथॉरिटी फॉर मेजर पोर्ट्स' (TAMP) का हस्तक्षेप कम होगा।

प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी का लक्ष्य

कॉर्पोरेट ढांचे में आने के बाद, इन पोर्ट्स के लिए भविष्य में स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने की संभावना भी खुल जाएगी। सरकार का लक्ष्य टर्मिनल ऑपरेशन्स में प्राइवेट भागीदारी को मौजूदा 66% से बढ़ाकर 2030 तक 85% करने का है।

क्या है रिस्क और चुनौतियां?

यह बदलाव Adani Ports और JSW Infrastructure जैसी कंपनियों के लिए कॉम्पिटिशन का नया माहौल तैयार करेगा। हालांकि, इस राह में लेबर यूनियंस का विरोध और पुरानी प्रशासनिक जटिलताएं बड़ी चुनौतियां हो सकती हैं। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सरकार इन रिफॉर्म्स को कितनी तेजी से लागू करती है और प्राइवेट सेक्टर इसमें कितनी दिलचस्पी दिखाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.