भारत सरकार ने अपनी नई 'Narcotics Control Vision 2026–2029' पॉलिसी का ऐलान कर दिया है। अब जांच का दायरा छोटे उपभोक्ताओं से हटकर बड़े सिंडिकेट्स और उनकी आर्थिक कमर तोड़ने पर केंद्रित रहेगा।
भारत सरकार ने सितंबर 2026 से ड्रग्स के खिलाफ अपनी लड़ाई की दिशा पूरी तरह बदल दी है। नई 'Vision Document on Narcotics Control (2026–2029)' के तहत सरकार का लक्ष्य अब उन बड़े नेटवर्क और फाइनेंसर्स को पकड़ना है, जो इस अवैध कारोबार की असली ताकत हैं।
आंकड़ों की सच्चाई और सिस्टम पर दबाव
2022 से 2024 के बीच के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स बताते हैं कि NDPS एक्ट के तहत दर्ज कुल मामलों में से लगभग 66% मामले केवल व्यक्तिगत कंजम्पशन (उपभोक्ता) से जुड़े थे। इस पुरानी नीति के कारण कोर्ट और जेलों पर भारी बोझ पड़ा, लेकिन असली ड्रग माफिया और उनके सप्लाई चेन पर कोई खास असर नहीं हुआ।
फाइनेंशियल जांच और सप्लाई चेन पर कड़ा पहरा
अब सरकार 'Whole-of-Government' एप्रोच अपना रही है, जिसमें Narco-Coordination Centre (NCORD) के जरिए केंद्र और राज्य एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। सबसे बड़ी बात यह है कि अब ड्रग माफियाओं के 'मनी ट्रेल' (Money Trail) की गहन जांच होगी ताकि उनके आर्थिक आधार को खत्म किया जा सके।
फार्मा कंपनियों के लिए बड़ी चेतावनी
Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) अब फार्मा सेक्टर की गतिविधियों पर पैनी नजर रखेगा। जो कंपनियां कफ सिरप या एनाल्जेसिक जैसे उत्पादों का निर्माण करती हैं, उन्हें अब ज्यादा सख्त अनुपालन (Compliance) का पालन करना होगा।
सितंबर 2026 से शुरू हो रहे एक साल के नेशनवाइड एनफोर्समेंट ड्राइव में मेडिकल दुकानों और बॉर्डर पॉइंट्स पर गहन निरीक्षण किया जाएगा। निवेशकों को सलाह है कि वे फार्मा सेक्टर में आने वाली इस रेगुलेटरी सख्ती और कंपनियों की ऑपरेशनल प्रोसीजर में हो रहे बदलावों पर खास नजर रखें।
