India Hiring Hotspot: दुनिया भर में नौकरी की रफ्तार धीमी, भारत में क्यों दिख रही है तेजी?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Hiring Hotspot: दुनिया भर में नौकरी की रफ्तार धीमी, भारत में क्यों दिख रही है तेजी?

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दुनिया भर में नौकरी बाजार धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, लेकिन भारत एक बड़ा ग्रोथ मार्केट बना हुआ है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंशियल सर्विसेज में बढ़त के कारण भारत में हायरिंग की रफ्तार तेज है।

क्या हुआ?

साल 2021 और 2022 में नौकरियों की बंपर भर्तियां देखने को मिली थीं। लेकिन अब नौकरी बाजार उस "उन्माद" से निकलकर एक सामान्य स्थिति में पहुंच गया है। रिक्रूटमेंट फर्म Michael Page के मुताबिक, कोरोना के बाद हायरिंग और सैलरी में जो तेजी थी, वह अब धीमी हो गई है। कंपनियां अब नौकरी देने और सैलरी बढ़ाने के मामले में ज्यादा सोच-समझकर फैसला ले रही हैं।

सैलरी में आई नरमी

पहले जब लोग नौकरी बदलते थे, तो उनकी सैलरी में 15% से 25% तक का उछाल आ जाता था। ऐसा इसलिए था क्योंकि कंपनियां डिजिटल प्रोजेक्ट्स के लिए तेजी से टैलेंट हायर कर रही थीं। लेकिन अब यह रफ्तार टिकाऊ नहीं रही। नई नियुक्तियों को पुरानी से ज्यादा सैलरी मिल रही थी, जिससे कंपनियों में सैलरी को लेकर दबाव बढ़ रहा था। अब दुनियाभर में नई नौकरियों के लिए सैलरी में औसतन 5% से 8% की बढ़ोतरी हो रही है, और उम्मीदवार भी अब इस नई हकीकत के आदी हो गए हैं।

भारत क्यों है खास?

इस वैश्विक मंदी के बावजूद, भारत नौकरी बाजार में एक बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है। इसकी एक बड़ी वजह ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का तेजी से बढ़ना है। यूरोप और दुनिया भर की कंपनियां अब भारत में अपने टेक्नोलॉजी, ऑपरेशन और डेटा मैनेजमेंट के लिए बड़े सेंटर खोल रही हैं। इससे स्किल्ड प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ी है, जो भारत को बाकी देशों से अलग खड़ा करती है, जहां हायरिंग की ग्रोथ धीमी है।

प्रमुख ग्रोथ सेक्टर्स

भारत में यह ग्रोथ सिर्फ कुछ चुनिंदा सेक्टर्स में ही दिख रही है। रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी में भी टैलेंट की भारी डिमांड है। इसके अलावा, फाइनेंशियल सर्विसेज, जिसमें नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs), बीमा कंपनियां और इन्वेस्टमेंट फर्म्स शामिल हैं, वे भी लगातार हायरिंग कर रही हैं। ये सेक्टर दिखाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मुख्य इंजन अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

AI का असर और स्किल्स का भविष्य

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब नौकरियों के स्वरूप को बदल रहा है। AI स्पेशलिस्ट की कमी है, लेकिन कंपनियां अपने मौजूदा कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रही हैं और ऐसे लोगों को हायर कर रही हैं जिनके पास अच्छे सॉफ्ट स्किल्स हैं। भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में AI कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर और सपोर्ट वाली नौकरियों को ऑटोमेट कर रहा है, जिससे हायरिंग का पैटर्न बदल रहा है। अब डेटा क्वालिटी मैनेजमेंट की जरूरत बढ़ गई है, और स्किल्ड डेटा एनालिस्ट की मांग बढ़ी है जो AI को लागू करने में मदद कर सकें।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

निवेशकों के लिए, ये हायरिंग ट्रेंड कंपनियों और सेक्टर्स के स्वास्थ्य को समझने का एक जरिया हैं। सैलरी में 5% से 8% जैसी बढ़ोतरी का मतलब है कि कंपनियां अपने खर्चों पर कंट्रोल कर रही हैं, जो उनके प्रॉफिट मार्जिन के लिए अच्छा है। हालांकि, GCCs और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर्स पर यह निर्भरता भारत की आर्थिक रफ्तार को ग्लोबल आउटसोर्सिंग ट्रेंड्स और लोकल कैपिटल स्पेंडिंग से जोड़ती है। अगर ग्लोबल कंपनियां मैक्रो इकोनॉमिक दबावों के कारण GCCs का विस्तार धीमा करती हैं, तो भारत की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कंपनियां हायरिंग के सामान्य होने पर अपने वेज कॉस्ट को कैसे मैनेज करती हैं। इसके अलावा, AI-संचालित भूमिकाओं की ओर बढ़ना भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इससे IT और टेक्नोलॉजी कंपनियों की लागत संरचना बदल सकती है। नई महंगी भर्तियों पर निर्भर रहने के बजाय कर्मचारियों को री-ट्रेन करने की कंपनियों की क्षमता अगले कुछ तिमाहियों में प्रॉफिट मार्जिन को बचाने में अहम साबित हो सकती है। इंफ्रास्ट्रक्चर या रियल एस्टेट गतिविधियों में कोई भी मंदी इन प्रमुख ग्रोथ सेक्टर्स में हायरिंग की गति में संभावित बदलावों का शुरुआती संकेत दे सकती है।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.