PM Surya Ghar योजना में बड़ा बदलाव: अब बिना सब्सिडी इंपोर्टेड सोलर मॉड्यूल लगा सकेंगे ग्राहक

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AuthorNeha Patil|Published at:
PM Surya Ghar योजना में बड़ा बदलाव: अब बिना सब्सिडी इंपोर्टेड सोलर मॉड्यूल लगा सकेंगे ग्राहक

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भारत सरकार ने PM Surya Ghar योजना के तहत सोलर पैनल लगाने के नियमों में बड़ी राहत दी है। अब जो ग्राहक सरकारी सब्सिडी का लाभ नहीं उठाएंगे, वे इंपोर्टेड (आयातित) सोलर मॉड्यूल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह नियम 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगा।

क्या है नया नियम?

नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने PM Surya Ghar योजना के लिए एक नया नियम लागू किया है। इसके तहत, जो निवासी ग्राहक सरकारी सब्सिडी नहीं लेना चाहते, वे सोलर पैनल के लिए 'Approved List of Models and Manufacturers' (ALMM) की अनिवार्यता से छूट पा सकते हैं। पहले, इस योजना के तहत लगने वाले सभी सोलर पैनल सरकारी लिस्ट के अनुसार ही खरीदने पड़ते थे, जिसमें ज्यादातर भारतीय निर्माता शामिल थे। अब, सब्सिडी छोड़ने वाले ग्राहक इंपोर्टेड सोलर मॉड्यूल का भी इस्तेमाल कर पाएंगे।

सब्सिडी या अपनी पसंद - क्या चुनें?

यह बदलाव ग्राहकों के लिए एक बड़ा अवसर है। एक तरफ, जो ग्राहक सरकारी सब्सिडी चाहते हैं, उन्हें अभी भी ALMM लिस्ट के घरेलू उत्पादों का ही इस्तेमाल करना होगा। इससे सरकारी पैसा घरेलू उद्योगों को मज़बूत करने में मदद करेगा। वहीं, दूसरी ओर, जो ग्राहक अपनी पसंद की टेक्नोलॉजी या सस्ता इंपोर्टेड मॉड्यूल लगाना चाहते हैं, उनके लिए 'Give It Up' (सब्सिडी छोड़ने) का रास्ता खुला है। वे नेशनल पोर्टल पर आवेदन करके और सब्सिडी न लेने का विकल्प चुनकर, घरेलू सामग्री की अनिवार्यता को दरकिनार कर सकते हैं। वे ग्रिड से बिजली लेने-देने (नेट मीटरिंग) की सुविधा का भी लाभ उठा पाएंगे।

सोलर सेक्टर के लिए क्यों ज़रूरी है ये बदलाव?

ALMM लिस्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सरकारी मदद से लगने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स में अच्छी क्वालिटी के घरेलू उत्पाद ही इस्तेमाल हों और भारत की सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़े। सब्सिडी न लेने वाले प्रोजेक्ट्स में इंपोर्टेड मॉड्यूल की अनुमति देने का मतलब यह नहीं है कि 'मेक इन इंडिया' पर जोर कम हो गया है। बल्कि, यह एक संतुलन बनाने का तरीका है। बिना सरकारी पैसे के लगने वाले प्रोजेक्ट्स में ALMM की बाध्यता हटाकर, सरकार घरेलू निर्माताओं की क्षमता पर बोझ डाले बिना, रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की गति बढ़ाना चाहती है।

बाजार और प्रतिस्पर्धा का माहौल

भारत के सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने हाल के वर्षों में काफी तरक्की की है और कई बड़ी कंपनियों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई है। रूफटॉप सोलर मार्केट काफी हद तक कीमत पर निर्भर करता है। हालांकि घरेलू सोलर पैनल अब प्रतिस्पर्धा में हैं, लेकिन वैश्विक बाजारों से मॉड्यूल खरीदने पर कीमत या उपलब्धता के मामले में फायदा मिल सकता है। यह नीति बाजार को उन ग्राहकों के बीच बांटने में मदद करेगी जिन्हें सब्सिडी की ज़रूरत है और उन ग्राहकों के लिए जो कीमत या उपलब्धता को ज़्यादा अहमियत देते हैं।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में घरेलू सोलर मॉड्यूल की मांग पर इस छूट के असर पर नज़र रखनी चाहिए। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने ग्राहक सब्सिडी छोड़कर इंपोर्टेड मॉड्यूल चुनते हैं। इससे यह पता चलेगा कि क्या विदेशी तकनीक ग्राहकों को ज़्यादा आकर्षित कर रही है। इसके अलावा, प्रमुख घरेलू सोलर मॉड्यूल निर्माताओं की कमेंट्री पर भी ध्यान देना होगा कि क्या यह नीति उनके लिए कोई चुनौती खड़ी करती है, या फिर रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में कुल वृद्धि से इसकी भरपाई हो जाती है। घरेलू सोलर सेक्टर की लंबी अवधि की सफलता उसकी क्षमता, क्वालिटी और वैश्विक सप्लायर्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने की लागत पर निर्भर करेगी।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.