सरकार की जांच एजेंसी DGTR ने चाइनीज ग्लाइसिन आयात और CPVC रेजिन पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी की कथित चोरी की जांच शुरू कर दी है। DCW, Epigral और Lubrizol जैसी कंपनियों ने अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस के खिलाफ आवाज उठाई है, जिससे घरेलू केमिकल सेक्टर के मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
व्यापार को बचाने की कवायद
भारत के ट्रेड रेगुलेटर, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) ने घरेलू केमिकल कंपनियों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए दो अलग-अलग जांच शुरू की हैं। यह कदम चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने की कोशिशों का हिस्सा है, जो कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में $112.6 बिलियन तक पहुंच गया है।
ग्लाइसिन पर जांच का घेरा
पहली जांच चीन से होने वाले ग्लाइसिन आयात पर केंद्रित है। 'Avid Organics' की शिकायत के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसमें आरोप है कि सस्ते आयात के कारण स्थानीय उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। DGTR अब साल 2022 से 2025 तक के डेटा का विश्लेषण करेगा। अगर डंपिंग साबित होती है, तो वित्त मंत्रालय इस पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा सकता है।
CPVC रेजिन में ड्यूटी की चोरी?
दूसरे मामले में, DCW Ltd, Epigral Ltd और Lubrizol Advanced Materials India ने शिकायत की है कि चीन और दक्षिण कोरिया की कंपनियां मलेशिया, जापान और थाईलैंड के जरिए माल भेजकर भारत की एंटी-डंपिंग ड्यूटी से बच रही हैं। इन मध्यवर्ती देशों से आयात में अचानक आई तेजी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
केमिकल सेक्टर के निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। यदि ड्यूटी सख्त की जाती है, तो भारतीय कंपनियों को अपनी कीमतों पर अधिक कंट्रोल मिलेगा और उनके प्रॉफिट मार्जिन सुरक्षित हो सकते हैं। हालांकि, दूसरी तरफ इस कदम से उन डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज की लागत बढ़ सकती है जो इन कच्चे माल पर निर्भर हैं। अब सबकी नजर DGTR की शुरुआती रिपोर्ट और वित्त मंत्रालय के अगले फैसले पर है, जो शेयर की दिशा तय करेंगे।
