प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2036 ओलंपिक की तैयारियों के लिए भारत की स्पोर्ट्स पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। अब देश का फोकस क्रिकेट से हटकर वाटर और विंटर स्पोर्ट्स को प्रमोट करने पर होगा, जिससे स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और इक्विपमेंट सेक्टर में नए मौके बनेंगे।
नई राह, नई चुनौतियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेल जगत में एक ऐतिहासिक बदलाव की नींव रखी है। 27 अगस्त 2026 को 'खेलो इंडिया डायलॉग' के दौरान उन्होंने साफ कर दिया कि भारत को अब क्रिकेट और हॉकी के दायरे से बाहर निकलकर पानी और बर्फ से जुड़े खेलों में महारत हासिल करनी होगी। सरकार का लक्ष्य 2036 ओलंपिक तक भारत की पदक संख्या को बड़े स्तर पर ले जाना है।
बिजनेस के नए अवसर
यह पॉलिसी केवल खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा आर्थिक बदलाव भी है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि वाटर स्पोर्ट्स (जैसे सर्फिंग) और विंटर स्पोर्ट्स के लिए नई ट्रेनिंग सुविधाओं, वर्ल्ड-क्लास इक्विपमेंट और स्पेशलाइज्ड कोचिंग की भारी डिमांड पैदा होगी। इससे स्पोर्ट्स कंस्ट्रक्शन, मैन्युफैक्चरिंग और स्पोर्ट्स मैनेजमेंट से जुड़ी कंपनियों को लंबे समय में फायदा हो सकता है। सरकार 5 से 15 साल के बच्चों के लिए देशभर में टैलेंट हंट शुरू करने जा रही है, जो इस इकोसिस्टम को मजबूती देगा।
निवेश का गणित और चुनौतियां
फिलहाल, देश की GDP में स्पोर्ट्स सेक्टर का योगदान मात्र 0.9% है। एक स्पोर्ट्स सुपरपावर बनने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। हालांकि, क्रिकेट-केंद्रित संस्कृति से हटकर मल्टी-स्पोर्ट माहौल बनाना एक बड़ी चुनौती है। निवेशकों के लिए सबसे जरूरी होगा यह देखना कि सरकार बजट एलोकेशन कैसे करती है और इंफ्रास्ट्रक्चर टेंडर कब निकलते हैं। आने वाले वर्षों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) इस पूरे सेक्टर की दिशा तय करेगी।
