भारत का फार्मा सेक्टर 2030 तक दोगुना होकर **$130 अरब** का हो जाने का अनुमान है। लेकिन, इस ग्रोथ के रास्ते में एक बड़ी रुकावट आ गई है – मैनेजमेंट टैलेंट की भारी कमी। कंपनियों के पास टेक्निकल और साइंटिफिक स्किल्स तो खूब हैं, पर मार्केटिंग और स्ट्रैटेजी के लिए ज़रूरी बिजनेस मैनेजमेंट स्किल्स की कमी साफ दिख रही है। यह टैलेंट गैप निवेशकों के लिए एक बड़ा रिस्क है।
क्या हुआ है?
भारतीय फार्मा इंडस्ट्री इस समय ज़बरदस्त विस्तार के दौर से गुज़र रही है। उम्मीद है कि घरेलू बाजार 2030 तक $60 अरब से बढ़कर $130 अरब का हो जाएगा। भारत जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में दुनिया का लीडर बना हुआ है और हर साल $30 अरब से ज़्यादा का एक्सपोर्ट करता है। लेकिन, अब एक नई समस्या सामने आई है: मैनेजमेंट टैलेंट की कमी। इस कमी को पूरा करने के लिए, Chitkara University जैसे संस्थान फार्मा मैनेजमेंट में स्पेशलाइज्ड ऑनलाइन MBA प्रोग्राम लेकर आए हैं। इसका मकसद साइंटिफिक और टेक्निकल ज्ञान और मार्केटिंग, रेगुलेटरी स्ट्रैटेजी और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे कॉम्प्लेक्स कामों के लिए ज़रूरी बिजनेस स्किल्स के बीच की खाई को पाटना है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह?
निवेशकों के लिए, फार्मा सेक्टर की ग्रोथ सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी या R&D पाइपलाइन से कहीं ज़्यादा है। यह 'एग्जीक्यूशन' यानी काम को अंजाम देने की क्षमता पर भी निर्भर करती है। जैसे-जैसे फार्मा कंपनियां आगे बढ़ेंगी, उनका ग्लोबल रेगुलेशंस को समझना, अपने प्रोडक्ट्स की सही कीमत तय करना और सप्लाई चेन को मैनेज करना अहम होता जाएगा। मैनेजमेंट स्किल्स की मौजूदा कमी एक छिपा हुआ ऑपरेशनल रिस्क है। अगर कंपनियां ऐसे लीडर्स नहीं ढूंढ पातीं जो रिसर्च लैब और कमर्शियल मार्केट के बीच पुल बना सकें, तो उन्हें कॉम्पिटिटिव और हाईली रेगुलेटेड माहौल में नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने या प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने में मुश्किल हो सकती है।
ग्रोथ स्टोरी बनाम एग्जीक्यूशन रिस्क
ऐतिहासिक रूप से, फार्मा इंडस्ट्री ने टेक्निकल और साइंटिफिक ट्रेनिंग को ज़्यादा प्राथमिकता दी है। लेकिन, जैसे-जैसे यह सेक्टर मैच्योर हो रहा है, डबल स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ रही है – ऐसे लोग जो किसी दवा के साइंस और मार्केट की इकोनॉमिक्स, दोनों को समझते हों। जिन कंपनियों में अपनी वर्कफोर्स को स्किल-अप करने या स्पेशलाइज्ड मैनेजमेंट टैलेंट को आकर्षित करने की क्षमता नहीं होगी, उन्हें धीमी ग्रोथ या इनएफिशिएंट ऑपरेशंस का सामना करना पड़ सकता है। हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स और कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स की ओर बढ़ना एक सोफिस्टिकेटेड कमर्शियल स्ट्रैटेजी की मांग करता है, जो सिर्फ टेक्निकल ट्रेनिंग से पूरी नहीं होती। इंडस्ट्री-फोकस्ड मैनेजमेंट एजुकेशन का आना, इस सेक्टर के ज़्यादा प्रोफेशनल और स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट स्ट्रक्चर की ओर बढ़ने का एक संकेत है।
निवेशक इसे कैसे देखें?
निवेशकों को मैनेजमेंट टैलेंट पर दिया जा रहा फोकस इंडस्ट्री के मैच्योर होने का संकेत मानना चाहिए। अब फोकस सिर्फ वॉल्यूम-ड्रिवन प्रोडक्शन से हटकर वैल्यू-एडेड ग्रोथ की ओर बढ़ रहा है। फार्मा कंपनियों का एनालिसिस करते समय, शेयरहोल्डर्स को सिर्फ R&D खर्च और रेवेन्यू ग्रोथ से आगे देखना होगा। मैनेजमेंट की डेप्थ और कमर्शियल स्ट्रैटेजी को लागू करने की क्षमता लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। जो कंपनी अपने ह्यूमन कैपिटल में निवेश करती है या टॉप-टियर मैनेजमेंट टैलेंट को आकर्षित करती है, वह डोमेस्टिक और इंटरनेशनल विस्तार की जटिलताओं को संभालने के लिए बेहतर स्थिति में होगी।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
आगे चलकर, निवेशकों को यह देखना चाहिए कि फार्मा कंपनियां अपने लीडरशिप ट्रांजीशन और टैलेंट रिटेंशन को कैसे मैनेज करती हैं। कुछ मुख्य एरिया जिन पर नज़र रखनी चाहिए:
- ऑपरेशनल एफिशिएंसी: देखें कि कंपनियां स्केल करने के साथ-साथ अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख पाती हैं या सुधार पाती हैं या नहीं, जो अक्सर इफेक्टिव सप्लाई चेन और मार्केटिंग मैनेजमेंट पर निर्भर करता है।
- प्रोडक्ट लॉन्च सक्सेस: कॉम्प्लेक्स रेगुलेटरी एनवायरनमेंट में नए ड्रग्स को सफलतापूर्वक लॉन्च और मार्केट करने की क्षमता मैनेजमेंट की क्वालिटी को सीधे तौर पर दर्शाती है।
- टैलेंट इन्वेस्टमेंट: ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट, ट्रेनिंग प्रोग्राम्स और नॉन-टेक्निकल रोल्स में स्पेशलाइज्ड कर्मियों की हायरिंग के बारे में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर ध्यान दें।
- रेगुलेटरी कंप्लायंस: ग्लोबल रेगुलेटरी हर्डल्स को मैनेज करने की क्षमता एक स्पेशलाइज्ड मैनेजमेंट स्किल है जो एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड फर्म्स के लिए क्रिटिकल है।
इन इंडिकेटर्स को ट्रैक करके, निवेशक बेहतर ढंग से समझ सकते हैं कि कोई कंपनी अपने भविष्य के ग्रोथ टारगेट्स को सपोर्ट करने के लिए स्ट्रक्चरल कैपेसिटी बना रही है या नहीं।
