India Pharma Export: भारतीय फार्मा सेक्टर ने भरी उड़ान, एक्सपोर्ट बढ़कर **$16.13 बिलियन** के पार

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Pharma Export: भारतीय फार्मा सेक्टर ने भरी उड़ान, एक्सपोर्ट बढ़कर **$16.13 बिलियन** के पार

भारत के फार्मा एक्सपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में शानदार तेजी देखी गई है। कुल एक्सपोर्ट **$16.13 बिलियन** तक पहुंच गया है, जिसमें यूरोप एक नए बड़े बाजार के रूप में उभरा है।

भारत के फार्मा सेक्टर ने वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। एक्सपोर्ट का आंकड़ा $16.13 बिलियन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 4.9% की बढ़त को दर्शाता है। यह ग्रोथ इस बात का सबूत है कि भारतीय दवा कंपनियां ग्लोबल मार्केट में बदलते ट्रेंड्स के साथ खुद को कितनी तेजी से ढाल रही हैं।

यूरोप बना नया ग्रोथ इंजन

यूरोपियन मार्केट में एक्सपोर्ट 9.66% बढ़कर $3.29 बिलियन हो गया है। अब यूरोप का भारत के कुल फार्मा एक्सपोर्ट में 20% से ज्यादा का योगदान है। यह डायवर्सिफिकेशन इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अमेरिकी बाजार में डिमांड में सुस्ती और कीमतों को लेकर काफी दबाव बना हुआ है।

दवाओं का नया पोर्टफोलियो

सेक्टर में सिर्फ दवाओं की बिक्री ही नहीं, बल्कि उत्पादन क्षमता में भी सुधार हुआ है। 'बल्क ड्रग्स' और 'इंटरमीडिएट्स' का एक्सपोर्ट 12.07% बढ़ा है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' की ओर एक मजबूत कदम है। वहीं, सर्जिकल प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में 9.53% का उछाल दर्ज किया गया है।

रिस्क और स्ट्रैटेजी

भारतीय कंपनियां अब लो-मार्जिन वाले जेनेरिक मॉडल से निकलकर हाई-वैल्यू 'बायोसिमिलर्स' और 'कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स' की ओर रुख कर रही हैं। हालांकि, इस बदलाव में रिसर्च पर भारी खर्च और अप्रूवल मिलने में लगने वाला लंबा समय एक बड़ा रिस्क भी है। इसके अलावा, US FDA और अन्य रेगुलेटरी बॉडीज की सख्त निगरानी भी निवेशकों के लिए एक बड़ा 'मॉनिटरेबल फैक्टर' है। आगे चलकर मार्जिन को बनाए रखना और ग्लोबल रेगुलेशंस का पालन करना कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.