India PE-VC Funding: जनवरी-जुलाई 2026 में **6%** की गिरावट, निवेश पहुंचा **$20.3 अरब**

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India PE-VC Funding: जनवरी-जुलाई 2026 में **6%** की गिरावट, निवेश पहुंचा **$20.3 अरब**

साल 2026 के पहले सात महीनों में भारत में प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) में निवेश **6%** घटकर **$20.3 अरब** पर आ गया है। हालांकि, रिन्यूएबल एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग और B2B सॉफ्टवेयर स्टार्टअप्स में निवेशकों का पैसा लगाना जारी है।

निवेश में आई गिरावट, पर खास सेक्टर्स में जारी है दम

रिसर्च फर्म वेंचर इंटेलिजेंस के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान भारत में PE-VC निवेश $20.3 अरब रहा। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 6% कम है। रियल एस्टेट को छोड़कर, जुलाई 2026 में करीब $3 अरब का निवेश हुआ, जो जुलाई 2025 के $3.2 अरब के मुकाबले लगभग स्थिर है।

रिन्यूएबल एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग पर खास फोकस

इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर, ग्लोबल निवेशकों के लिए हॉट टॉपिक बना हुआ है। जुलाई में एक बड़ा डील हुआ, जिसमें ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म Brookfield के सपोर्ट वाले रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म Lumara में $600 मिलियन का निवेश किया गया। एनर्जी के अलावा, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, विशेषकर ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री भी काफी पूंजी आकर्षित कर रही है। प्राइवेट इक्विटी फर्म्स डेटा सेंटर्स, हेल्थकेयर और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (NBFCs) जैसे सेक्टर्स में भी दिलचस्पी दिखा रही हैं।

वेंचर कैपिटल निवेशकों का ध्यान अब बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) सॉफ्टवेयर कंपनियों की ओर गया है। खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को इंटीग्रेट करने वाले स्टार्टअप्स में जबरदस्त रुचि देखी जा रही है। Sarvam AI और Emergent Labs जैसी फर्में अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए निवेशकों का ध्यान खींच रही हैं।

मार्केट की मजबूती और भविष्य की उम्मीदें

कुल 756 डील्स में $20.3 अरब का निवेश यह दर्शाता है कि ग्लोबल और डोमेस्टिक निवेशक भारतीय प्राइवेट मार्केट्स के प्रति प्रतिबद्ध हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि मैक्रोइकॉनॉमिक चुनौतियों और पब्लिक मार्केट्स में उतार-चढ़ाव के बावजूद यह मजबूती बनी हुई है, जिसने हाल के दिनों में IPOs की गति को धीमा कर दिया है।

हाल के एग्जिट्स, जैसे कि सेकेंडरी मार्केट सेल्स और Meta-CRED डील जैसी स्ट्रैटेजिक एक्विजिशन, ने निवेशकों की रुचि बनाए रखने में मदद की है। ये एग्जिट्स फंड्स को लिक्विडिटी प्रदान करते हैं, जिससे वे नई ऑपर्चुनिटीज में कैपिटल रीसायकल कर पाते हैं। साल के बाकी बचे महीनों के लिए मार्केट की उम्मीदें बताती हैं कि अगर ग्लोबल कंडीशंस स्थिर रहीं, तो भारत में प्राइवेट कैपिटल का कुल डिप्लॉयमेंट 2025 के स्तर के करीब रहने की संभावना है।

निवेशक आगे चलकर यह भी देखेंगे कि जियोपॉलिटिकल फैक्टर्स और ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स डील-मेकिंग की गति को कैसे प्रभावित करते हैं। स्टार्टअप्स का प्रॉफिटेबिलिटी की ओर स्पष्ट रास्ता दिखाने की क्षमता और आने वाले एग्जिट्स की सफलता प्राइवेट इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम के स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.