Ministry of Rural Development ने अब ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता परखने के लिए IIT और NIT के विशेषज्ञों को मैदान में उतारा है। यह कदम 'Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana' के तहत सड़कों की मजबूती बढ़ाने के लिए उठाया गया है, जिससे उन कंस्ट्रक्शन कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो टेंडर जीतने के लिए बहुत कम बोली लगाती थीं।
सरकार ने 8,00,000 किमी लंबे ग्रामीण सड़क नेटवर्क की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक नया और कड़ा नियम लागू किया है। अब केवल सतही जांच ही नहीं, बल्कि डिजाइन, ड्रेनेज और सामग्री (material) की गहराई से पड़ताल की जाएगी।
कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर कसेगा शिकंजा
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश करने वालों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। अक्सर कंपनियां सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए अनुमानित लागत से 25% से 30% तक कम बोली (low-ball bidding) लगाती हैं, जिसका सीधा असर निर्माण की गुणवत्ता पर पड़ता है। नई व्यवस्था के तहत, इंटर-स्टेट इंस्पेक्शन टीम मोबाइल ऐप के जरिए लैब टेस्टिंग करेगी और साइट पर काम की कड़ी निगरानी रखेगी। जो कंपनियां मानक पूरा नहीं करेंगी, उन्हें ब्लैकलिस्ट करने या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
बजट और डेडलाइन का नया गणित
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए सरकार ने 26,474 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए ₹18,907 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। सरकार अब टेंडर अप्रूवल से लेकर काम शुरू होने तक के लिए 72 दिन की सख्त डेडलाइन लागू कर रही है।
निवेशकों को उन कंपनियों के मार्जिन पर नजर रखनी चाहिए जो ग्रामीण सड़क परियोजनाओं पर ज्यादा निर्भर हैं। क्योंकि अब काम में देरी या घटिया सामग्री का उपयोग सीधे तौर पर भुगतान और भविष्य के कॉन्ट्रैक्ट्स को प्रभावित करेगा। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में इसके पायलट प्रोजेक्ट्स सफल रहने के बाद, इसे पूरे देश में लागू किया जा रहा है।
