सरकार ने Agnipath स्कीम में बड़ा बदलाव करते हुए अग्निवीरों को **2 साल** का सेवा विस्तार देने का निर्णय लिया है। अब **3,00,000** जवानों के लिए परमानेंट भर्ती का विकल्प भी खुल गया है, जिससे पुरानी **25%** रिटेंशन कैप खत्म हो गई है।
भारत सरकार ने अपने मिलिट्री रिक्रूटमेंट प्रोग्राम Agnipath में बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव किया है। 4 नवंबर 2026 को घोषित नई नीति के तहत, अब अग्निवीर अपने 4 साल के कार्यकाल के बाद 2 साल का और विस्तार ले सकेंगे। इसे 'सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी' का नाम दिया गया है, जो योग्यता के आधार पर परमानेंट एनलिस्टमेंट (Permanent Enlistment) का मौका देता है।
रिटेंशन मॉडल में बदलाव
पहले के नियमों के तहत हर बैच से केवल 25% अग्निवीरों को ही आगे जारी रखा जाना था, लेकिन अब इस सख्त सीमा को हटाकर एक फ्लेक्सिबल मॉडल लागू किया गया है। इससे रक्षा मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य सेना के भीतर तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभवी मानव संसाधन को बनाए रखना है। वर्तमान में आर्मी, एयरफोर्स और नेवी में तैनात करीब 3,00,000 कर्मियों के लिए यह एक बड़ा करियर बूस्ट है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि के अनुसार, यह फैसला स्कीम के परफॉरमेंस की समीक्षा के बाद लिया गया है। शुरुआती बैच के जवानों की तकनीकी क्षमता को देखते हुए, सेना ने अनुभवी लोगों को सिस्टम में बनाए रखने को प्राथमिकता दी है।
सरकारी खजाने और डिफेंस सेक्टर पर असर
इस बदलाव के दूरगामी आर्थिक प्रभाव होंगे। अधिक संख्या में अग्निवीरों को परमानेंट करने से सरकार के वेतन और पेंशन बिल में बढ़ोतरी होना तय है, जो डिफेंस बजट की प्लानिंग को प्रभावित करेगा। हालांकि, यह कदम डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सपोर्ट इकोसिस्टम के लिए एक स्थिर माहौल तैयार करता है। निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि सरकार इस खर्च को बजट में कैसे एडजस्ट करती है और परमानेंट एब्जॉर्प्शन के नए क्राइटेरिया क्या होंगे।
