भारत और नेपाल ने अपनी सीमाओं को सुरक्षित बनाने के लिए नई तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। अब बॉर्डर पर ड्रोन, AI-मॉनिटरिंग और हाई-टेक स्कैनर लगाए जाएंगे, जिससे घरेलू डिफेंस और सर्विलांस कंपनियों के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं।
काठमांडू में हुई 10वीं द्विपक्षीय बैठक के बाद सशस्त्र सीमा बल (SSB) और नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स ने बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने पर सहमति जताई है। अब पारंपरिक गश्त की जगह ड्रोन सर्विलांस, AI-इनेबल्ड मॉनिटरिंग सिस्टम और हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा।\n\n### डिफेंस कंपनियों पर असर\nयह कदम सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के विजन का हिस्सा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के सरकारी समझौतों से डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सेक्टर में नए टेंडर निकलने की उम्मीद बढ़ जाती है। रडार, ऑप्टिक्स और ड्रोन-आधारित समाधान बनाने वाली कंपनियां जैसे कि Bharat Electronics Ltd (BEL) और Zen Technologies पर निवेशकों की नजरें बनी रहेंगी।\n\n### निवेशकों के लिए अहम संकेत\nहालाँकि, इन घोषणाओं का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर तब दिखेगा जब सरकारी टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी। प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन में दुर्गम इलाका और बजट आवंटन जैसी चुनौतियां भी हो सकती हैं। निवेशक अब सरकारी फाइलिंग्स और आने वाले टेंडर्स पर नजर रख रहे हैं, जो यह तय करेंगे कि यह योजना कंपनियों के ऑर्डर बुक में कितनी बड़ी जगह बनाती है। अगली द्विपक्षीय बैठक में इन नई सुरक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता और तैनाती के पैमाने की समीक्षा की जाएगी।
