India Mining Sector: नीलामी के बाद भी नहीं चल पा रही खदानें, 733 में से सिर्फ 125 ब्लॉक एक्टिव

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Mining Sector: नीलामी के बाद भी नहीं चल पा रही खदानें, 733 में से सिर्फ 125 ब्लॉक एक्टिव

भारत के माइनिंग सेक्टर में एक बड़ा 'एग्जीक्यूशन गैप' सामने आया है। सरकार द्वारा नीलाम किए गए **733** मिनरल ब्लॉक्स में से अब तक केवल **125** ही प्रोडक्शन शुरू कर पाए हैं।

उत्पादन में बाधा और चुनौतियां

भारत का माइनिंग सेक्टर एक गंभीर ऑपरेशनल बॉटलनेक से जूझ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नीलाम हुए खदानों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी कागजों तक ही सीमित है। यह धीमा प्रदर्शन उन प्रयासों को कमजोर कर रहा है, जिसके जरिए भारत अपनी खनिज आयात (Mineral Imports) पर निर्भरता को कम करना चाहता है।

क्यों हो रही है इतनी देरी?

एक सफल बोली लगाने के बाद, खदान से उत्पादन शुरू करने में औसतन 7 साल से भी ज्यादा का समय लग रहा है। इसके पीछे मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

  • लैंड एक्विजिशन: जमीन के पुराने रिकॉर्ड और फिजिकल पजेशन हासिल करने में आ रही दिक्कतों के कारण प्रोजेक्ट्स अटक रहे हैं।
  • मंजूरी का चक्रव्यूह: फॉरेस्ट और एनवायरमेंटल क्लीयरेंस मिलने में कई साल लग जाते हैं, क्योंकि कई बार कंपन्सेटरी अफोरेस्टेशन (पौधारोपण) के लिए जमीन पहले से चिह्नित नहीं होती।

निवेशकों के लिए जोखिम

माइनिंग कंपनियों ने इन ब्लॉक्स को हासिल करने के लिए भारी-भरकम राशि upfront जमा की है। जब ये प्रोजेक्ट्स सालों तक ठंडे बस्ते में रहते हैं, तो कंपनियों का कैश फ्लो बुरी तरह प्रभावित होता है। इससे रिटर्न रेशियो पर दबाव बनता है और निवेशकों के लिए भविष्य की कमाई का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।

आगे की राह

अब केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही है ताकि क्लीयरेंस और लेवी (Levies) की जटिलताओं को कम किया जा सके। भविष्य में माइनिंग पॉलिसी में होने वाले बदलाव और 'प्री-क्लियर्ड' लैंड बैंक की खबरें इस सेक्टर की रफ्तार तय करेंगी। निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो स्टेट-लेवल की इन बाधाओं को पार कर तेजी से प्रोडक्शन शुरू करने में सक्षम हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.