Bureau of Civil Aviation Security (BCAS) ने एयरपोर्ट और एयरलाइन स्टाफ के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक अनिवार्य कर दी है। अब फिजिकल परमिट की जगह डिजिटल बायोमेट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल होगा, ताकि सुरक्षा और बेहतर हो सके।
फिजिकल परमिट का दौर खत्म
Bureau of Civil Aviation Security (BCAS) ने एक बड़े बदलाव का ऐलान किया है। अब एयरपोर्ट और एयरलाइन कर्मचारियों के लिए फिजिकल 'एयरोड्रोम एंट्री परमिट' (AEPs) की जगह फेशियल रिकग्निशन तकनीक लेगी। हर साल लगभग 15 लाख परमिट जारी किए जाते हैं, जिन्हें अब डिजिटल बायोमेट्रिक एक्सेस में बदला जाएगा। इस कदम का सीधा मकसद सुरक्षा को सख्त करना और टर्मिनल पर भीड़ को कम करना है।
फुल-बॉडी स्कैनर्स की तैनाती
बायोमेट्रिक सिस्टम के साथ ही सरकार देश के 8 प्रमुख एयरपोर्ट्स पर फुल-बॉडी स्कैनर्स लगाने की प्रक्रिया को तेज कर रही है। 3 एयरपोर्ट्स पर हार्डवेयर पहुंच चुका है, और बाकी 5 जगहों पर भी जल्द ही ये मशीनें लग जाएंगी। ये स्कैनर्स मेटल और नॉन-मेटल दोनों तरह की वस्तुओं का पता लगाने में सक्षम होंगे।
सुरक्षा में बदलाव की वजह
हाल ही में एक Flydubai फ्लाइट के दौरान कॉकपिट में हुई सुरक्षा चूक के बाद सरकार ने यह सख्त फैसला लिया है। Ministry of Civil Aviation ने इस घटना के बाद पुरानी पेंडिंग सिक्योरिटी अपडेट्स को प्राथमिकता दी है। दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोच्चि जैसे एयरपोर्ट्स पर पहले भी इस तकनीक के ट्रायल किए जा चुके हैं।
निवेशकों के लिए संकेत
एविएशन सेक्टर के लिए यह बदलाव अहम है। हालांकि इससे सुरक्षा और कार्यक्षमता बढ़ेगी, लेकिन एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन पर बड़ा इन्वेस्टमेंट करना होगा। इससे कंपनियों के ऑपरेटिंग एक्सपेंस (OPEX) और कैपिटल एक्सपेंस (CAPEX) में बढ़त देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, इतने बड़े पैमाने पर बायोमेट्रिक डेटा का स्टोरेज होने से साइबर सुरक्षा भी एक अहम चिंता का विषय बनी रहेगी।
