India Launches FAST-DS: विदेशी संपत्ति की जानकारी देने की नई स्कीम!

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Launches FAST-DS: विदेशी संपत्ति की जानकारी देने की नई स्कीम!

आयकर विभाग ने 'फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स-डिस्क्लोजर स्कीम' (FAST-DS) लॉन्च की है, जो 16 अगस्त से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगी। यह स्कीम उन लोगों को मौका देगी जो अपनी विदेशी संपत्ति या आय का खुलासा पहले नहीं कर पाए थे। सही जानकारी और टैक्स या फीस भरकर लोग 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं।

FAST-DS क्या है और यह कैसे काम करती है?

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने आधिकारिक तौर पर 'फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स-डिस्क्लोजर स्कीम' (FAST-DS) का ऐलान किया है। यह एक वॉलंटरी स्कीम है, जिसका मकसद छोटे करदाताओं, जैसे छात्र, युवा पेशेवर और एनआरआई (NRI) को अपनी विदेश में पड़ी संपत्ति या आय की जानकारी देने का एक मौका देना है, जिसे उन्होंने पहले अपनी टैक्स रिटर्न्स में नहीं बताया था।

डिस्क्लोजर की कैटेगरीज़:

इस स्कीम के तहत, डिस्क्लोजर को दो कैटेगरी में बांटा गया है, जिनके लिए अलग-अलग वित्तीय नियम हैं:

  • पहली कैटेगरी: इसमें वे विदेशी संपत्ति या आय शामिल हैं जिनका खुलासा पहले टैक्स के लिए नहीं किया गया था। इसकी लिमिट ₹1 करोड़ तक है। इस कैटेगरी के तहत, लोगों को 60% का प्रभावी टैक्स रेट देना होगा। इसमें 30% टैक्स और उस पर 30% की अतिरिक्त राशि शामिल होगी।
  • दूसरी कैटेगरी: यह कैटेगरी उन विदेशी संपत्तियों के लिए है जो तब एक्वायर की गई थीं जब टैक्सपेयर नॉन-रेसिडेंट थे, या फिर टैक्स के लिए ऑफर की गई थीं लेकिन ठीक से रिपोर्ट नहीं हुईं। इस कैटेगरी के लिए लिमिट ₹5 करोड़ है और इसमें टैक्स की जगह ₹1 लाख की एक फ्लैट फीस देनी होगी।

जुर्माने और सजा से राहत:

इस स्कीम का एक बड़ा फायदा यह है कि यह करदाताओं को अनुपालन (compliance) का एक रास्ता देती है। वैलिड डिस्क्लोजर करने और जरूरी पेमेंट करने पर, टैक्सपेयर्स को 'ब्लैक मनी (अनडिस्क्लोस्ड फॉरेन इनकम एंड एसेट्स) एंड इम्पाउंड ऑफ टैक्स एक्ट, 2015' के तहत किसी भी पेनल्टी या कानूनी कार्रवाई से छूट मिल जाएगी। इतना ही नहीं, घोषित की गई संपत्ति या आय को इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 या ब्लैक मनी एक्ट के तहत कुल आय की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।

टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी बातें:

जो लोग इस स्कीम का फायदा उठाना चाहते हैं, उनके लिए सबमिशन की विंडो 16 अगस्त 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक ही खुली रहेगी। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि संपत्ति का सही बाजार मूल्य 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार बताया जाए।

यह एक वन-टाइम मौका है, इसलिए यह एक खुली प्रक्रिया नहीं है। अगर फाइलिंग के दौरान गलत या अधूरी जानकारी दी गई, तो डिस्क्लोजर रिजेक्ट हो सकता है। निवेशकों और व्यक्तियों को अपनी विदेशी संपत्ति की होल्डिंग्स को ध्यान से देखना चाहिए और साल के अंत की डेडलाइन से पहले यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे स्कीम के एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करते हैं, किसी क्वालिफाइड टैक्स एडवाइजर से सलाह लेनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.