साल 2026 की दूसरी छमाही में भारतीय प्राइमरी मार्केट (Primary Market) में IPOs की बहार आने वाली है। **238** कंपनियां **₹4.72 लाख करोड़** जुटाने की योजना बना रही हैं। यह सब तब हो रहा है जब साल की शुरुआत में शेयर बाजार में थोड़ी गिरावट देखी गई थी, लेकिन SIPs के ज़रिए घरेलू निवेशकों का लगातार निवेश प्राइमरी मार्केट को मजबूती दे रहा है।
क्या हुआ?
साल 2026 के अंत तक भारतीय प्राइमरी मार्केट (Primary Market) में काफी हलचल देखने की उम्मीद है। 238 कंपनियां पब्लिक इश्यू (Public Issue) के ज़रिए ₹4.72 लाख करोड़ जुटाने के लिए तैयार हैं। यह योजना जुलाई से दिसंबर के बीच पूरी की जानी है। यह कवायद ऐसे समय में हो रही है जब साल की पहली छमाही में Nifty50 में 8.66% और BSE Sensex में 10.25% की गिरावट दर्ज की गई थी।
बड़ी कंपनियों के नाम भी शामिल
आने वाली लिस्ट में भारत के कई बड़े और जाने-माने कॉर्पोरेट ब्रांड्स शामिल हैं। टेक दिग्गज Jio Platforms और PhonePe के साथ-साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) भी पब्लिक मार्केट में कदम रखने की तैयारी में हैं। इसके अलावा, SBI Funds Management, क्विक-कॉमर्स कंपनी Zepto, रिन्यूएबल एनर्जी प्लेयर Avaada Electro और OYO के नाम से जानी जाने वाली हॉस्पिटैलिटी कंपनी Oravel Stays भी इस लिस्ट में हैं।
बाजार की गिरावट के बावजूद IPOs में मजबूती क्यों?
प्राइमरी मार्केट ने तब भी कमाल की मजबूती दिखाई है जब सेकेंडरी मार्केट (Secondary Market), यानी जहां रोज़ाना शेयर खरीदे-बेचे जाते हैं, दबाव में था। 2026 की पहली छमाही में 27 कंपनियों ने सफलतापूर्वक ₹22,555 करोड़ जुटाए। एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि इस मजबूती का श्रेय घरेलू निवेशकों को जाता है, जिन्होंने बाजार में लगातार पैसा लगाया है। खास तौर पर, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) के ज़रिए म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) में हर महीने ₹30,000 करोड़ से ज़्यादा का इनफ्लो (Inflow) बना हुआ है। यह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के सामने एक मजबूत सहारा साबित हो रहा है।
वैल्यूएशन (Valuation) पर चेतावनी
भले ही IPO पाइपलाइन (Pipeline) बहुत बड़ी है, लेकिन हर IPO की सफलता की गारंटी नहीं है। पहली छमाही का एक बड़ा सबक यह है कि निवेशक अब ज़्यादा सेलेक्टिव (Selective) हो गए हैं। बाजार के रुझान बताते हैं कि जो कंपनियां वाजिब और अच्छी तरह से जस्टिफाई (Justify) किए गए वैल्यूएशन पर शेयर पेश करती हैं, वे अच्छी मांग आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, महंगी मानी जाने वाली कंपनियों को खरीदार ढूंढने में मुश्किल होती है। निवेशकों के लिए, इसका मतलब है कि अब सिर्फ कंपनी का ब्रांड नाम काफी नहीं है; शेयर किस कीमत पर पेश किए जा रहे हैं, इसकी तुलना कंपनी के असल मुनाफे (Profit) और ग्रोथ की संभावनाओं से की जाएगी, जो अब निर्णायक फैक्टर होगा।
निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए?
जैसे-जैसे बाजार नई लिस्टिंग्स (Listings) के इस इनफ्लो (Inflow) के लिए तैयार हो रहा है, निवेशकों को कुछ खास इंडिकेटर्स (Indicators) पर नज़र रखनी चाहिए। सबसे पहले, व्यापक सेकेंडरी मार्केट के स्वास्थ्य की निगरानी करें; स्थिर या बढ़ते शेयर की कीमतें आम तौर पर IPOs की सफलता के लिए एक बेहतर माहौल बनाती हैं। दूसरे, अलग-अलग IPOs की प्राइसिंग (Pricing) और वैल्यूएशन (Valuation) पर बारीकी से ध्यान दें। आखिर में, फंड जुटाने के इस्तेमाल को लेकर मैनेजमेंट (Management) की कमेंट्री (Commentary) देखें, क्योंकि जो कंपनियां कर्ज़ चुकाने के बजाय प्रोडक्टिव विस्तार (Productive Expansion) के लिए पूंजी का उपयोग करती हैं, उन्हें बाजार अक्सर ज़्यादा तरजीह देता है।
