चिकन नेक को मिला सुपरकनेक्ट! रेलवे का ₹2.93 लाख करोड़ का प्लान, सुरक्षा और इकोनॉमी दोनों मजबूत

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
चिकन नेक को मिला सुपरकनेक्ट! रेलवे का ₹2.93 लाख करोड़ का प्लान, सुरक्षा और इकोनॉमी दोनों मजबूत
Overview

भारत की सुरक्षा और कनेक्टिविटी के लिए बेहद अहम 'चिकन नेक' कहे जाने वाले सिलिगुड़ी कॉरिडोर में भारतीय रेलवे एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है। इसके तहत **35.76 किलोमीटर** लंबी अंडरग्राउंड रेलवे लाइन का निर्माण किया जाएगा, जिसका मकसद पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क को और भी सुरक्षित और निर्बाध बनाना है।

'चिकन नेक' में सुरक्षा का नया जाल: 35.76 किमी की अंडरग्राउंड रेल

यह प्रोजेक्ट न सिर्फ सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के पूर्वोत्तर हिस्से को बाकी भारत से जोड़ने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जो नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं से सटा है, प्राकृतिक आपदाओं और सुरक्षा खतरों के प्रति संवेदनशील रहा है। इस 35.76 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेलवे लाइन का निर्माण (टिनमाइल हाट से रंगपाणी और बागडोगरा तक) इसी संवेदनशीलता को दूर करने के लिए किया जा रहा है। यह भारतीय रेलवे के 2026-27 के लिए ₹2.93 ट्रिलियन के रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय) का हिस्सा है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर सरकार के फोकस को दिखाता है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के रेलवे प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष रूप से ₹11,486 करोड़ का आवंटन किया गया है।

एडवांस इंजीनियरिंग और सेक्टर पर असर

इस प्रोजेक्ट में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें टनल बोरिंग मशीन (TBM) और NATM (न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड) का उपयोग शामिल है। यह न केवल निर्माण की गति बढ़ाएगा, बल्कि जटिल भूभागों में भी टनलिंग को संभव बनाएगा। इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पुश से इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनियों, रोलिंग स्टॉक निर्माताओं और सिग्नलिंग उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए ऑर्डर्स में भारी वृद्धि की उम्मीद है। Ircon International और RVNL जैसी कंपनियों को इस सेक्टर में मजबूत सरकारी ऑर्डर्स मिले हैं।

लागत का गणित: क्यों अंडरग्राउंड इतना महंगा?

अंडरग्राउंड रेलवे लाइनों का निर्माण जमीन के ऊपर या एलिवेटेड लाइनों की तुलना में काफी महंगा होता है। भारत में, अंडरग्राउंड मेट्रो लाइनों की लागत प्रति किलोमीटर ₹350 करोड़ से ₹600 करोड़ तक जा सकती है, जबकि एलिवेटेड सेक्शन ₹150-300 करोड़ प्रति किलोमीटर में तैयार हो जाते हैं। इस 35.76 किमी की लाइन की अनुमानित लागत अभी बताई नहीं गई है, लेकिन इसकी अधिक लागत इस क्षेत्र को दी जा रही सामरिक प्राथमिकता को दर्शाती है। भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में लागत बढ़ने (Cost Overrun) और देरी का इतिहास रहा है, जिस पर निवेशकों को ध्यान देना चाहिए।

एनालिस्ट की राय और जोखिम

रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेस में Rail Vikas Nigam Ltd. (RVNL), Ircon International और Titagarh Rail Systems जैसी प्रमुख कंपनियां हैं। हालांकि, एनालिस्ट की राय अलग-अलग है। उदाहरण के लिए, Indian Railway Finance Corporation (IRFC) को एक एनालिस्ट से 'Strong Sell' की रेटिंग मिली है, जो इसके शेयर में बड़ी गिरावट का संकेत देता है। यह दिखाता है कि सरकारी खर्च और सेक्टर की तेजी के बावजूद, व्यक्तिगत कंपनियों के फंडामेंटल्स का बारीकी से मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण है। भू-राजनीतिक संवेदनशीलता और निर्माण की जटिलताएं इस प्रोजेक्ट के लिए एक जोखिम कारक हो सकती हैं।

भविष्य की राह: कनेक्टिविटी का महा-अभियान

2026-27 के बजट के समर्थन से, भारतीय रेलवे का दीर्घकालिक विजन बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिकीकरण और सुरक्षा पर केंद्रित है। सिलिगुड़ी कॉरिडोर का अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट, ट्रैक इलेक्ट्रिफिकेशन और एडवांस सिग्नलिंग सिस्टम के विस्तार जैसी बड़ी योजनाओं का हिस्सा है। पूर्वोत्तर क्षेत्र का लगातार विकास, बजट में महत्वपूर्ण आवंटन के साथ, भारत की आर्थिक शक्ति और मजबूत परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को और बढ़ाएगा।

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