स्कूलों में स्वच्छता का संकट: भारत के 5 करोड़ बच्चे अभी भी मूलभूत सुविधाओं से दूर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
स्कूलों में स्वच्छता का संकट: भारत के 5 करोड़ बच्चे अभी भी मूलभूत सुविधाओं से दूर

WHO और UNICEF की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 5 करोड़ छात्र अब भी स्कूल में बेसिक सैनिटेशन (स्वच्छता) की कमी झेल रहे हैं, हालांकि 2015 के बाद से इस दिशा में **14%** का सुधार दर्ज किया गया है।

WHO और UNICEF के नए असेसमेंट ने भारत के स्कूली इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ी खाई की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 5 करोड़ बच्चे ऐसे स्कूलों में पढ़ रहे हैं जहां बेसिक सैनिटेशन की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। यह आंकड़ा वैश्विक स्तर पर वंचित 24 करोड़ 40 लाख बच्चों का एक बड़ा हिस्सा है। अच्छी खबर यह है कि 2015 से 2025 के बीच इन सुविधाओं से वंचित स्कूलों की संख्या में 14% की कमी आई है।

पानी बनाम स्वच्छता: असमान प्रगति

रिपोर्ट में ड्रिंकिंग वाटर और सैनिटेशन के बीच एक साफ अंतर नजर आता है। भारत 2030 तक स्कूलों में यूनिवर्सल ड्रिंकिंग वाटर के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सही बढ़ रहा है, जहाँ सालाना 4% से अधिक की दर से सुधार हो रहा है। फिलहाल भारत में 1 करोड़ 20 लाख बच्चे बेहतर पेयजल स्रोतों से दूर हैं। दूसरी ओर, हाइजीन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जहाँ लगभग 2 करोड़ बच्चे ऐसे स्कूलों में हैं जहाँ हाथ धोने की सुविधा नहीं है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और पॉलिसी की चुनौतियां

ग्लोबल सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) को हासिल करने के लिए मौजूदा निर्माण गति नाकाफी है। वैश्विक स्तर पर सैनिटेशन सेवाओं में 5 गुना तेज निर्माण की जरूरत है। भारत के लिए भी यह जरूरी है कि वह सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपना कैपिटल एलोकेशन बढ़ाए। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल एक पॉलिसी लक्ष्य है, बल्कि यह बच्चों की अटेंडेंस और हेल्थ आउटकम्स का एक मुख्य ड्राइवर है। अब देखना यह होगा कि सरकार बजट और राज्य स्तर पर परियोजनाओं की गति को कैसे रफ्तार देती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.