India Exposition Mart ने SEBI के पास अपना IPO ड्राफ्ट (DRHP) फाइल कर दिया है। कंपनी **3.02 करोड़** शेयर जारी करके फंड जुटाएगी, जिसका इस्तेमाल ग्रेटर नोएडा स्थित अपने वेन्यू को मॉडर्नाइज करने और हॉल का विस्तार करने में किया जाएगा। हालांकि, पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी के नेट प्रॉफिट में गिरावट दर्ज की गई है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
ग्रेटर नोएडा में बनेगा नया एक्सपो हब?
India Exposition Mart, जो ग्रेटर नोएडा में इंडिया एक्सपो सेंटर और मार्ट का संचालन करती है, अब पब्लिक मार्केट में एंट्री करने के लिए तैयार है। कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा कर दिया है। इस इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के तहत कंपनी 3.02 करोड़ इक्विटी शेयर जारी करेगी। इस ऑफर में 75 लाख फ्रेश शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि मौजूदा निवेशकों द्वारा 2.27 करोड़ शेयरों की ऑफर-फॉर-सेल (OFS) होगी। इसमें Vectra Investments और MIL Vehicles & Technologies जैसे निवेशक शामिल हैं।
कैसे होगा फंड का इस्तेमाल?
कंपनी इस जुटाए गए फंड का उपयोग मीटिंग्स, इंसेटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन (MICE) सेक्टर में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करेगी। ग्रेटर नोएडा स्थित अपने वेन्यू के इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्नाइज करने के लिए लगभग ₹63.8 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसमें एयर-हैंडलिंग यूनिट्स, कूलिंग टावर्स, लिफ्ट, एस्केलेटर और वेरिएबल-फ्रीक्वेंसी ड्राइव्स को अपग्रेड करना शामिल है। इसके अलावा, कंपनी एग्जीबिशन हॉल 4 और हॉल 6 के रेनोवेशन और नए एग्जीबिशन हॉल 18 के कंस्ट्रक्शन पर ₹30.8 करोड़ खर्च करने की योजना बना रही है, जिससे एग्जीबिशन स्पेस में इजाफा होगा।
मिक्स परफॉर्मेंस वाले नतीजे
कंपनी के फाइनेंशियल नतीजों पर नजर डालें तो पिछले फाइनेंशियल ईयर (मार्च 2026 तक) में India Exposition Mart ने ₹290.6 करोड़ का कुल रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के ₹241.2 करोड़ की तुलना में 20.5% अधिक है। वहीं, टॉप-लाइन ग्रोथ के बावजूद, नेट प्रॉफिट में 21% की गिरावट आई और यह ₹31.6 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹40 करोड़ था। रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद प्रॉफिट घटने से यह संकेत मिलता है कि कंपनी की ऑपरेटिंग कॉस्ट या मेंटेनेंस का खर्चा बढ़ा है।
मोनोपॉली का रिस्क
निवेशकों को कंपनी के बिजनेस मॉडल में एक बड़ा रिस्क भी दिख रहा है - कंसंट्रेशन रिस्क। कंपनी का पूरा कारोबार ग्रेटर नोएडा के एक ही वेन्यू पर निर्भर है। ऐसे में, अगर इस लोकेशन पर कोई रेगुलेटरी बदलाव, ऑपरेशनल दिक्कत या इवेंट्स की डिमांड में कमी आती है, तो इसका सीधा असर कंपनी के रेवेन्यू पर पड़ेगा। इसके अलावा, इवेंट्स का सेक्टर साइक्लिकल होता है, यानी यह इकोनॉमिक कंडीशंस के साथ ऊपर-नीचे होता रहता है।
आगे क्या?
आने वाले समय में, IPO के लिए कंपनी का वैल्यूएशन, SEBI से मिलने वाली फाइनल मंजूरी और एक्सपेंशन प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन मुख्य बातें होंगी। बाजार के जानकार यह भी देखेंगे कि कंपनी अपने ऑपरेशनल कॉस्ट को कैसे मैनेज करके प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाती है, खासकर जब वह अपनी कैपेसिटी बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
