ZED क्वालिटी स्कीम का विस्तार: अब सर्विस सेक्टर के MSMEs को मिलेगा 'जीरो डिफेक्ट, जीरो इफ़ेक्ट' का सर्टिफिकेशन!

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AuthorMehul Desai|Published at:
ZED क्वालिटी स्कीम का विस्तार: अब सर्विस सेक्टर के MSMEs को मिलेगा 'जीरो डिफेक्ट, जीरो इफ़ेक्ट' का सर्टिफिकेशन!

भारत सरकार 'जीरो डिफेक्ट जीरो इफ़ेक्ट' (ZED) क्वालिटी सर्टिफिकेशन प्रोग्राम को सर्विस सेक्टर तक फैला रही है। इस बड़े कदम का मकसद छोटे सर्विस प्रोवाइडर्स को ग्लोबल कंपीटिटिवनेस बढ़ाने में मदद करना है। इस इनिशिएटिव से छोटी कंपनियों को अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने, बिज़नेस स्ट्रक्चर को फॉर्मल बनाने और क्रेडिट व फाइनेंशियल इंसेंटिव्स तक बेहतर पहुंच बनाने में सहायता मिलेगी।

अब सर्विस सेक्टर भी क्वालिटी के नए मानक पर खरा उतरेगा!

केंद्र सरकार अपने 'जीरो डिफेक्ट जीरो इफ़ेक्ट' (ZED) सर्टिफिकेशन स्कीम का दायरा बढ़ाकर अब सर्विस सेक्टर को भी शामिल कर रही है। यह एक अहम रणनीतिक कदम है, जो छोटे व्यवसायों को अंतर्राष्ट्रीय क्वालिटी मानकों पर खरा उतरने में मदद करेगा। पहले यह प्रोग्राम सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के लिए था, लेकिन अब ZED का लक्ष्य सर्विस-ओरिएंटेड बिजनेसेज जैसे हेल्थकेयर और हॉस्पिटैलिटी के लिए भी वेस्टेज कम करना, एफिशिएंसी बढ़ाना और आउटपुट की क्वालिटी को बेहतर बनाना है।

क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) का खास प्लान

क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) और नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC) मिलकर सर्विस सेक्टर के लिए खास क्वालिटी पैरामीटर्स तैयार कर रहे हैं। यह एक मुश्किल काम है, क्योंकि सर्विस क्वालिटी अक्सर इनटैन्जिबल (intangible) होती है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग में प्रोडक्ट डिफेक्ट्स को मापना आसान होता है। सरकार का लक्ष्य देश के करीब 9.2 करोड़ छोटे बिजनेसेज में से लगभग 38% सर्विस फर्म्स को फॉर्मल इकोनॉमी का हिस्सा बनाना है।

'ZED' सर्टिफिकेशन के फायदे:

बिजनेस मालिकों के लिए, ZED स्कीम सिर्फ एक सर्टिफिकेशन से कहीं बढ़कर है। यह फाइनेंशियल सपोर्ट भी प्रदान करती है। इसमें माइक्रो-एंटरप्राइजेज के लिए सर्टिफिकेशन कॉस्ट का 80% तक और मीडियम-साइज़्ड फर्म्स के लिए 50% तक सब्सिडी शामिल है। यह प्रोग्राम MSME चैंपियंस स्कीम और वर्ल्ड बैंक-सपोर्टेड राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग MSME परफॉर्मेंस (RAMP) इनिशिएटिव का भी हिस्सा है। डायरेक्ट सब्सिडी के अलावा, सर्टिफिकेशन बैंकों और इन्वेस्टर्स को यह संकेत देता है कि कंपनी स्टैंडर्डाइज्ड और भरोसेमंद प्रक्रियाओं के साथ काम कर रही है, जिससे क्रेडिट की उपलब्धता बढ़ सकती है और उधार लेने की लागत कम हो सकती है।

नई नीतियां, बेहतर बिज़नेस माहौल

यह पॉलिसी अपडेट हाल ही में पास हुए माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज डेवलपमेंट (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के साथ मिलकर काम करेगा। जहां ZED का फोकस क्वालिटी और ग्लोबल कंपीटिटिवनेस पर है, वहीं नया कानून पेमेंट में देरी की समस्या से निपटेगा और डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन को सुव्यवस्थित करेगा। इन उपायों का संयुक्त उद्देश्य MSMEs के लिए एक अधिक स्थिर माहौल बनाना है, ताकि वे वैश्विक सप्लाई चेन में इंटीग्रेट हो सकें और ग्रो कर सकें।

आगे क्या?

इन्वेस्टर्स और स्टेकहोल्डर्स को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सर्विस-सेक्टर के बिजनेसेज इन मानकों को कितनी तेजी से अपनाते हैं। एग्जीक्यूशन के स्तर पर एक बड़ी चुनौती यह है कि विभिन्न सर्विस इंडस्ट्रीज के लिए स्टैंडर्डाइज्ड मेट्रिक्स को परिभाषित करना जटिल है, और छोटी फर्म्स को फॉर्मलाइजेशन व असेसमेंट की प्रक्रिया समय लेने वाली लग सकती है। इसके अलावा, इन प्रोग्राम्स की असल सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या वे इन बिजनेसेज के लिए ऑपरेशनल एफिशिएंसी और क्रेडिट अवेलेबिलिटी में वास्तविक सुधार लाते हैं। अगली बड़ी अपडेट सर्विस इंडस्ट्रीज के लिए स्टैंडर्डाइज्ड असेसमेंट क्राइटेरिया के ऑफिशियल लॉन्च पर होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.