Infrastructure Sector: भारत में प्रोजेक्ट मैनेजर्स की भारी किल्लत, क्या मुनाफे पर पड़ेगा बुरा असर?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Infrastructure Sector: भारत में प्रोजेक्ट मैनेजर्स की भारी किल्लत, क्या मुनाफे पर पड़ेगा बुरा असर?

भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में साल **2035** तक **1,60,000** और अधिक कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट मैनेजर्स की जरूरत होगी। निवेशकों के लिए यह टैलेंट गैप बड़े जोखिम का संकेत है, क्योंकि इससे प्रोजेक्ट्स में देरी और मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन अब इसके सामने एक बड़ी ऑपरेशनल चुनौती खड़ी हो गई है। Project Management Institute (PMI) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत को साल 2035 तक 1,60,000 नए कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट मैनेजर्स की दरकार है। यह मौजूदा मांग से 67% ज्यादा है, जो देश के बड़े विकास लक्ष्यों को पूरा करने में एक बड़ी बाधा बन सकता है।

निवेशकों के लिए क्यों है यह 'Execution Risk'?

इंफ्रा और इंजीनियरिंग कंपनियों में निवेश करने वालों के लिए यह सिर्फ लेबर मार्केट का डेटा नहीं, बल्कि 'एक्जीक्यूशन रिस्क' का सीधा संकेत है। हाईवे, इंडस्ट्रियल पार्क और पावर प्लांट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स बेहद जटिल होते हैं। जब कंपनी के पास इन प्रोजेक्ट्स को शुरू से अंत तक संभालने के लिए अनुभवी लीडरशिप नहीं होती, तो बजट बढ़ने (Cost Overruns) और प्रोजेक्ट में देरी होने का खतरा 2 गुना बढ़ जाता है।

इसका असर सीधे बैलेंस शीट पर दिखता है। प्रोजेक्ट्स में देरी होने से कंपनियों को भारी पेनल्टी देनी पड़ती है और कर्ज का ब्याज बढ़ जाता है, जिससे नेट मार्जिन घट जाता है। भविष्य में वही कंपनियां जीतेंगी जो अपनी टीम को बेहतर तरीके से रिटेन कर सकेंगी।

टेक्नोलॉजी और नई चुनौतियां

अब काम करने का तरीका भी बदल रहा है। आजकल के प्रोजेक्ट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा और कॉम्प्लेक्स सप्लाई चेन का इस्तेमाल होता है, जिसे संभालने के लिए हाई-लेवल स्किल की जरूरत है।

इसी समस्या को हल करने के लिए 3 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में एक बड़ा सम्मेलन होने जा रहा है, जिसमें 800 से ज्यादा लीडर्स इस पर चर्चा करेंगे कि कैसे AI और नई टेक्नोलॉजी के जरिए टैलेंट गैप को कम किया जाए।

आगे क्या देखें?

निवेशकों को अब कंपनियों की रिक्रूटमेंट और ट्रेनिंग पॉलिसी पर बारीकी से नजर रखनी होगी। जो कंपनियां अपने इंटरनल ट्रेनिंग प्रोग्राम्स को मजबूत कर रही हैं या डिजिटल मैनेजमेंट टूल्स को अपना रही हैं, वे लंबे समय में बेहतर वैल्यू दे सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.